मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान महामुख्यमंत्री-2017 की सूची में चौथे स्थान पर थे. इस साल वे दो पायदान नीचे खिसक कर छठे स्थान पर पहुंच गये हैं. एक ऐसे वक्त में जब भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने अलग ही तरह की चुनौतियां हों, शिवराज सिंह चौहान की हैसियत का घटना थोड़ा अजीब लग सकता है. लेकिन ऐसा हुआ है तो इसकी कुछ वजहें भी हैं.

सबसे पहली बात यह कि मध्य प्रदेश में पिछले कुछ समय में किसानों के कई आंदोलन हुए हैं. शिवराज सिंह के विकास माॅडल के मूल में यह बात रही है कि उद्योग और कृषि का विकास साथ-साथ भी हो सकता है. मध्य प्रदेश के कृषि विकास की तारीफ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी करते रहे हैं. ऐसे में बहुत लोगों को मध्य प्रदेश के किसानों की नाराजगी हजम नहीं हो रही है. इसके अलावा जो मध्य प्रदेश पिछले 15 सालों से भाजपा का गढ़ रहा है, वहां कांग्रेस एक नई ऊर्जा के साथ काम करते दिख रही है.

इन वजहों के चलते कई लोगों को लग रहा है कि कुछ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में उनका जीतना काफी मुश्किल है. जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री थे तो उस दौर में शिवराज भाजपा के दूसरे सबसे ताकतवर मुख्यमंत्री माने जाते थे. मोदी के प्रधानमंत्री मंत्री बनने के बाद वे भाजपा के सबसे ताकतवर मुख्यमंत्री थे. लेकिन योगी आदित्यनाथ के उभार के बाद शिवराज फिर दूसरे स्थान पर आ गए हैं. यही वजह है कि आदित्यनाथ इस बार सत्याग्रह महामुख्यमंत्री में उसी चौथे स्थान पर हैं जहां पिछले साल शिवराज सिंह चौहान थे.

सत्याग्रह महामुख्यमंत्री-2018 में सातवें स्थान पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह हैं. पिछले साल वे इस सूची के शीर्ष पांच मुख्यमंत्रियों में थे. पिछले साल जब पंजाब में उन्होंने कांग्रेस की वापसी कराई थी तो लगा था कि कांग्रेस उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी यह कहते हुए इस्तेमाल करेगी कि उन्होंने न सिर्फ भाजपा को रोका है बल्कि उस आम आदमी पार्टी की भी दाल नहीं गलने दी जिसे पंजाब में सबसे तगड़ा दावेदार माना जा रहा था. लेकिन कांग्रेस ने उन्हें पंजाब में ही सीमित कर रखा है और यही उनके कमजोर होने की मुख्य वजह भी है.

कांग्रेस पार्टी में कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और राहुल गांधी के संबंध बहुत अच्छे नहीं हैं. राहुल गांधी का जिस तरह का सहज संबंध अशोक गहलोत जैसे नेताओं के साथ दिखता है, वह सहजता उनके और कैप्टन के रिश्तों में नहीं दिखती. इसके बावजूद विकास और गवर्नेंस से लेकर गठबंधन राजनीति में स्वीकार्यता जैसे पैमानों पर अमरिंदर सिंह का बेहतर प्रदर्शन उन्हें शीर्ष दस में बनाए हुए है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस बार सत्याग्रह की सूची में आठवें स्थान पर हैं. पिछले साल वे दस मुख्यमंत्रियों की इस सूची में दसवें स्थान पर ही थे. केजरीवाल की ताकत कुछ तो अपने कामों की वजह से बढ़ी है और कुछ दूसरे मुख्यमंत्रियों के कमजोर होने से. वे बात-बात पर केंद्र सरकार से जिस तरह से दो-दो हाथ करते नजर आते हैं, वह भी उन्हें मोदी विरोधी राजनीति में प्रासंगिक बनाए रखता है. उपराज्यपाल के साथ टकराव में शीर्ष अदालत का फैसला दिल्ली सरकार के पक्ष में आने से भी अरविंद केजरीवाल की स्थिति थोड़ी मजबूत हुई है.

केजरीवाल की राजनीति का केंद्र राष्ट्रीय राजधानी होना भी उन्हें सियासी ताकत देता है. यही वजह है कि जब वे उपराज्यपाल के खिलाफ अनशन पर बैठे तो उनके समर्थन में चार गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री सड़कों पर उतर गए. ममता बनर्जी, चंद्रबाबू नायडू, एचडी कुमारस्वामी और पी. विजयन का ऐसा करना दिखाता है कि केजरीवाल की राजनीतिक गोलबंदी की क्षमता खत्म नहीं हुई है. दिल्ली में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी की विरोधी है. इसलिए वह कभी सीधे केजरीवाल के पक्ष में उतरते नहीं दिखती. बस यही एक फांस है जो आम आदमी पार्टी के गले में अटकी हुई है. अगर केजरीवाल किसी तरह से कांग्रेस के साथ समन्वय करने में कामयाब हो जाते हैं तो उनकी राजनीतिक हैसियत और बढ़ना तय है.

जिस ईज आॅफ डूइंग बिजनेस का हवाला मोदी सरकार देती है, उसमें भी दिल्ली के कारोबारी हालात में आए बदलावों का जिक्र है. इसके अलावा स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी केजरीवाल सरकार के कामों की काफी तारीफ हो रही है. साथ ही केजरीवाल सरकार की जनता के द्वार पर ही सेवाएं उपलब्ध कराने की नई योजना की भी देश में काफी चर्चा हो रही है.

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव सत्याग्रह की सूची में इस साल नौवें स्थान पर हैं. पिछले साल वे इसमें आठवें स्थान पर थे. चंद्रशेखर राव की अपनी एक राजनीतिक हैसियत है. वे औपचारिक तौर पर तो भाजपा के साथ नहीं हैं लेकिन कई बार केंद्र की मोदी सरकार का साथ दे चुके हैं. प्रधानमंत्री मोदी भी उनकी तारीफ करते रहते हैं. हाल ही में लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंद्रशेखर राव की तारीफ करते हुए कहा था कि उनके नेतृत्व में तेलंगाना अपने ढंग से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है.

चंद्रशेखर राव का कामकाज भी अच्छा बताया जाता है. अलग राज्य बनने के बाद उन्होंने जमीन के दस्तावेजों को दुरुस्त करने से लेकर सिंचाई सुविधा दुरुस्त करने तक के काम किये हैं जिनकी तारीफ उनके विरोधी भी करते हैं. औद्योगिक विकास के मोर्चे पर चंद्रशेखर राव सरकार का कामकाज अच्छा बताया जाता है. चंद्रशेखर राव केंद्र सरकार से संबंध ठीक रखकर राज्य के लिए फंड लेने की कोशिश करते और कई बार इसमें कामयाब होते हुए भी दिखते हैं. केंद्र सरकार के सहयोग से तेलंगाना में कई विकास परियोजनाएं चल रही हैं.

गठबंधन राजनीति में केसीआर की स्वीकार्यता को लेकर भी कोई समस्या नहीं है. उन्हें भी अपनी अच्छी स्थिति का अहसास है. इसीलिए छह सितंबर को उन्होंने वक्त से पहले ही तेलंगाना की विधानसभा को भंग करने का नया दांव खेला है. जानकारों का मानना है कि ऐसा करके उन्होंने न केवल अपने विरोधियों को भौचक कर दिया है बल्कि जल्दी चुनाव होने की स्थिति में उन्हें इसका फायदा पहुंचना भी तय है. इसके अलावा लोक सभा और विधान सभा के चुनाव अलग-अलग होने पर वे दोनों चुनावों पर अपना पूरा ध्यान भी लगा सकते हैं.

सत्याग्रह की महामुख्यमंत्री सूची में दसवें स्थान पर केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन हैं. पिछले साल वे नौवें स्थान पर थे. पिछले साल तक कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार दो राज्यों - केरल और त्रिपुरा - में थी. लेकिन अब वे कम्युनिस्ट पार्टी के अकेले मुख्यमंत्री हैं. विकास और गवर्नेंस के मोर्चे पर उनकी स्थिति जस की तस बनी हुई है. गठबंधन राजनीति में स्वीकार्यता के मामले में उन्हें कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन उनकी पार्टी की आंतरिक राजनीति कुछ ऐसी है कि उसमें विजयन को पार्टी कितना आगे बढ़ने देगी, यही कहना बेहद मुश्किल है. ऐसे में पार्टी में स्थिति के मामले में वे क्षेत्रीय पार्टियों के मुख्यमंत्रियों के मुकाबले कमजोर दिखते हैं.

इसके अलावा राज्य के बाहर भी उनका कोई ऐसा प्रभाव नहीं है जो चुनावों में उनकी पार्टी को कोई लाभ दिला सके. प्रधानमंत्री बनने की संभावना के पैमाने पर भी उनकी स्थिति कमजोर है. उनकी पार्टी की हैसियत भी राष्ट्रीय राजनीति में लगातार कमजोर हो रही है. इस वजह से भी उनकी स्थिति कमजोर हुई है. ऐसे में विकास और गवर्नेंस के मोर्चे पर उनका काम ही है जो उन्हें शीर्ष दस में बनाए हुए है.


महामुख्यमंत्री-2018 : देश के सबसे ताकतवर और प्रभावी 10 मुख्यमंत्री

#1 कमजोर मुख्यमंत्रियों वाले इस दौर में ममता बनर्जी अपवाद हैं

#2 नीतीश कुमार अभी भले कमजोर हैं लेकिन भविष्य में क्या होगा, कहा नहीं जा सकता

#3 विकास और गवर्नेंस के पैमाने पर चंद्रबाबू नायडू अभी भी बाकी मुख्यमंत्रियों से मीलों आगे हैं

#4 उपचुनावों में हार के बाद योगी आदित्यनाथ कमजोर होने के बजाय मजबूत हो गये हैं

#5 नवीन पटनायक और उनकी पार्टी की प्रकृति गठबंधन राजनीति से पूरी तरह मेल खाती है

#6-10 इनमें से दो मुख्यमंत्रियों के नाम शीर्ष पांच में भी हो सकते थे

महामुख्यमंत्री-2017 : देश के सबसे ताकतवर और प्रभावी 10 मुख्यमंत्री