शराब कारोबारी विजय माल्या दूर देश (लंदन) में बैठे हैं. लेकिन वे भारत में भी भरपूर सुर्ख़ियां बटोर रहे हैं. अभी हाल में ही उन्होंने एक बयान देकर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को मुश्किल में डाल दिया है. उन्होंने कहा था कि भारत छोड़ने से पहले वे जेटली से मिले थे. इसके बाद बाद जेटली सहित केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के अन्य मंत्री भी बचाव की मुद्रा में हैं. जेटली ने तुरंत सफाई भी दी, ‘मुलाकात अनौपचारिक’ थी. इस पर अनावश्यक विवाद खड़ा करना ठीक नहीं है.’ लेकिन इस सफाई बावज़ूद विपक्षी पार्टियां जेटली को घेरने की तैयारी कर रही हैं. उन्होंने इस मेल-मुलाकात की जांच की मांग कर दी है. वहीं दूसरी तरफ सूत्रों के हवाले से ख़बर आई है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जेटली तो नहीं पर उनके मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को माल्या के मामले में आरोपित करने की तैयारी कर ली है.

द इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार सीबीआई विजय माल्या के मामले में जल्द अदालत में नया आरोप पत्र दायर कर सकती है. इसमें केंद्रीय वित्त मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को आरोपित बनाया जा सकता है. केंद्र की यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार के कार्यकाल के दौरान माल्या को विभिन्न बैंकों से कर्ज दिलाने में प्रभावी भूमिका निभाने के इन अफसरों पर आरोप लगाए जा सकते हैं. अख़बार के मुताबिक सीबीआई ने इस बाबत वित्त मंत्रालय से संपर्क कर ज़रूरी दस्तावेज़ पहले ही कब्ज़े में ले लिए हैं. इन दस्तावेज़ों की पड़ताल जारी है. इस प्रक्रिया में अब तक कुछ अहम सुराग हाथ लग चुके हैं. इस प्रक्रिया से जुड़े सूत्र इसकी पुष्टि करते हैं.

इस मामले की आंच भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) तक भी पहुंच रही है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक अन्य ख़बर बताती है कि माल्या के देश छोड़ने से चार दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने एसबीआई की तत्कालीन अध्यक्ष अरुंधती भट्‌टाचार्या से मुलाकात की थी. उन्हें आग़ाह किया था कि माल्या देश छोड़कर भाग सकते हैं. यह बात 28 फरवरी 2016 की है. दवे ने अख़बार को बताया, ‘मैंने एसबीआई को मशविरा दिया था कि अगले दिन यानी 29 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर माल्या के देश छोड़ने पर रोक लगवा दी जाए. लेकिन मेरी सलाह पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. जबकि शीर्ष स्तर पर सब इस घटनाक्रम से वाक़िफ़ थे.’

ग़ौरतलब है कि माल्या पर 9,000 करोड़ रुपए से अधिक की कर्ज़ धाेखाधड़ी का आरोप है. उन्होंने फ़र्ज़ी दस्तावेज़ और अपने प्रभावी संपर्कों की मदद से लगातार अपनी कंपनी के लिए भारतीय बैंकों से यह कर्ज़ लिया. फिर इसे चुकाए बिना देश छोड़कर भाग गए. वे फिलहाल लंदन में हैं. उन्हें प्रत्यर्पित कर भारत लाने की कोशिश की जा रही है. उनके प्रत्यर्पण का मामला लंदन की अदालत में चल रहा है. हाल में ही आई ख़बरों की मानें तो इस मामले में इसी साल के अंत तक फैसला आ सकता है. हालांकि फैसला भारत के पक्ष में ही होगा यह दावे के साथ नहीं कहा जा सकता. क्योंकि ब्रिटेन में बीते सालों में भारतीय आरोपितों से जुड़े ऐसे कई मामले ख़ारिज़ हो चुके हैं.