सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामले में लगाई जाने वाली भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को पलटते हुए कहा है कि दहेज उत्पीड़न मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी में अब से परिवार कल्याण समिति की कोई भूमिका नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पुलिस अब इसके तहत किसी महिला की शिकायत पर उसके पति और ससुराल वालों को तुरंत गिरफ्तार कर सकती है. यह फैसला मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल जुलाई में धारा 498ए के दुरुपयोग पर दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा था कि दहेज के मामलों में महिला के पति और ससुराल वालों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी और उनके पास अग्रिम जमानत लेने का विकल्प भी रहेगा. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों को सुलझाने के लिए परिवार कल्याण समिति बनाने की बात कही थी. लेकिन, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले को पलट दिया. हालांकि, आरोपितों के पास अग्रिम जमानत लेने का अधिकार फिलहाल बरकरार है.

आईपीसी की धारा 498 ए दहेज और दहेज के लिए होने वाली हिंसा के आरोपितों पर लगाई जाती है. इसके तहत दोषी पाए जाने वाले आरोपितों को न्यूनतम तीन साल की सजा का प्रावधान है.