इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे के आस-पास मौजूद कई संरचनाओं पर गाज गिर सकती है. हवाई अड्डे का संचालन करने वाली कंपनी के मुताबिक बहुमंजिला इमारतों और टॉवरों जैसी इन तमाम संरचनाओं के कारण हवाई जहाजों की लैंडिंग में दिक्कत हो रही है. इन इमारतों पर ऊंचाई की तय सीमा को लांघने का आरोप है. हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को जीएमआर ग्रुप की अगुवाई वाले दिल्ली इंटरनेशल एयरपोर्ट लिमिटेड (डीआईएएल) ने ऐसी 176 संरचनाओं से संबंधित कंपनियों और सरकारी महकमों को नोटिस जारी किया है. उनसे इन संरचनाओं के बनने की तारीख और उनकी ऊंचाई जैसी जानकारियां मांगी गई हैं.

नियमों के अनुसार हवाई अड्डे के 20 किलोमीटर के क्षेत्र में कोई भी ढांचा तैयार करने से पहले भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होता है. अगर कोई ढांचा इसके बिना बनता है तो उसे एक चेतवानी के बाद गिराया जा सकता है. चौंकाने वाली बात यह है कि इन 176 संरचनाओं में से अधिकांश संरचनाएं हवाई अड्डे के चार किलोमीटर के दायरे में हैं. इनमें से ज्यादातर रिहायशी इलाकों में हैं जिनका निर्माण दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की मंजूरी के बाद हुआ है. गुरुग्राम का एंबिएंस मॉल, वसंत विहार का जेपी वसंत कॉन्टिनेंटल होटल और वंसतकुंज मॉल इन विवादित ढांचों में शामिल हैं.

एएआई के एक अधिकारी के अनुसार संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर इन संरचनाओं के कारण हो रही रुकावटों को दूर करने के लिए कहा जाएगा. यदि वे ऐसा करने में असफल होते हैं तो फिर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय इमारतों को तोड़ना शुरू कर सकता है.

इससे पहले 30 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी दक्षिण दिल्ली नगर निगम, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) और नोएडा अथॉरिटी को इस बाबत आदेश जारी करते हुए कहा था कि अब आईजीआई के प्रतिबंधित दायरे में कोई निर्माण कार्य नहीं होगा. कोर्ट ने उस समय जहाज की सुरक्षा में खतरा पैदा करने वाली 365 रुकावटों के निपटारे में असफल होने के कारण डीजीसीए और डीआईएएल को भी फटकार लगाई थी.