राहुल जी, मानसरोवर यात्रा पर जाने का ख्याल आपको कैसे आया?

देखिए, सच तो ये है कि मुझे पीएम की कुर्सी से अलग और कोई ख्याल आजकल आता ही नहीं! उससे अलग दिमाग और जबान पर जो भी आता है वह सब उसी एक मुख्य ख्याल का सहयोगी है.

आपने कहा था कि कोई भी व्यक्ति कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर तभी जाता है जब वहां से बुलावा आता है. आखिर कैसे पता चला कि कैलाश आपको बुला रहा है?

कैलाश ने एक ट्वीट करके मुझे बुलाया ...अब्ब्ब मेरा मतलब है कि जब मुझे एक कुर्सी का मौन निमंत्रण समझ में आ सकता है, तो क्या इतने बड़े पहाड़ के बुलावे का पता नहीं चलेगा!

सुनने में आ रहा है कि आपने 35 किलोमीटर की पैदल यात्रा सात घंटों में पूरी कर ली. बिना अभ्यास के आप इतनी दूर कैसे चल सके?

अभ्यास खिलाड़ी करते हैं नेता नहीं! नेता सिर्फ खेलते हैं जनता की भावनाओं से... अऽअ मेरा कहने का मतलब है कि मैंने देशभर में लोगों से मिलने के लिए बहुत सारी यात्राएं की थीं, जिससे मेरा स्टैमिना बढ़ गया था. वही स्टैमिना मानसरोवर की यात्रा में काम आया.

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कैलाश मानसरोवर की आपकी यात्रा की तस्वीरों को फोटोशॉप किया हुआ कहा है. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

मैं उनकी पकड़ की दाद देता हूं!... मेरा मतलब है कि कांग्रेस के लोगों को अभी फोटोशॉप में बीजेपी के जितना परफेक्ट होने में समय लगेगा. हमें इस पर अभी और काम करने की जरूरत है.

कैलाश मानसरोवर की यात्रा के बाद से कांग्रेस आपको शिवभक्त कह रही है. लेकिन एक सच्चे भक्त और उसकी भक्ति के बीच इतने फोटो और फिटनेस डेटा की जगह कहां होती है?

21वीं सदी के मोदी भक्तों को देखने के बाद भी आप ऐसा सवाल कैसे कर सकती हैं!

क्या मतलब?

मेरा मतलब है कि आजकल असली भक्त वही है जो सोशल मीडिया पर डेटा वॉर में डटा हुआ है. आप किसी भी भक्त को उठाकर देख लीजिए पक्का और असली भक्त वही माना जाएगा, जिसने अपनी पार्टी और अपने आराध्य देव के लिए किस्म-किस्म के डेटा, फोटो और एनालिसिस का पूरा खाता खोला हुआ है. जिसका जितना बड़ा डेटा और फोटो बैंक, वो उतना ही बड़ा भक्त! तो इतने जुझारू भक्तों के दौर में यदि मैं बिना किसी फोटो और डेटा के भगवान के दरबार में जाऊंगा तो वे खुद ही मुझे उलाहना देंगे कि देखो एक इंसान की भक्ति में डूबे भक्त भी फोटो और डेटा के मामले में मुझसे इतने आगे हैं. फिर मैं भगवान की भक्ति में खाली हाथ कैसे डूब सकता हूं भला. (मुस्कुराते हुए)

कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से आपका एक फिटनेस डेटा जारी करते हुए लिखा है कि आपने 463 मिनटों में 34.31 किलोमीटर की यात्रा तय की, जो कि 46,433 कदम होते हैं. आखिर इस फिटनेस वॉच का डिटेल देने की क्या जरूरत थी?

यदि वर्तमान प्रधानमंत्री एक वीडियो के माध्यम से पूरे देश को फिटनेस चैलेंज दे सकते हैं तो क्या एक भावी प्रधानमंत्री अपनी तरह से फिटनेस चैलेंज नहीं दे सकता!

कैलाश यात्रा के दौरान आपके द्वारा चले गए कदमों तक का हिसाब देने का भला क्या मतलब है. क्या आपके हिसाब से ज्यादा कदम चलने को प्रधानमंत्री बनने का पैमाना बनाया जा सकता है?

इसे पैमाना बनाया जा सकता था पर इसमें बड़ा खतरा ये है कि फिर कोई मुझसे भी बड़ा टट्टू प्रधानमंत्री बन जाएगा! (ठहाका लगाते हुए)

आपकी मानसरोवर यात्रा को भाजपा पाखंड कह रही है, इस बारे में आपका क्या कहना है?

एक पाखंडी ही दूसरे के पाखंडी को इतने अच्छे से पहचान सकता है.

यह बताइए आप शिवभक्त कब-से बन गए?

तभी से जब से मोदी जी ने सबको साथ लेकर सबका विकास करना शुरू किया.

राहुल जी, बतौर प्रधानमंत्री मोदी जी की कौन-सी खूबी आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करती है?

मोदी जी मास्टर माइंड हैं...मेरा मतलब है कि वे बहुत चीजों में माहिर हैं. लेकिन उनकी जो चीज मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित करती है वो है उनका अभिनय. मैंने बहुत-सी हॉलीवुड फिल्में देखी हैं, लेकिन उनकी टक्कर का अभिनेता बॉलीवुड क्या हॉलीवुड में भी नहीं है!

अच्छा यह बताइए कि कांग्रेस के वॉर रूम में भ्रम की स्थिति क्यों बनी हुई है?

देखिए, कांग्रेस घृणा और हिंसा में यकीन नहीं रखती बल्कि प्यार देने और लेने में यकीन रखती है. इसलिए हमने ‘वॉर रूम’ नहीं बल्कि ‘लव रूम’ बनाया है. यह तो आप भी समझती होंगी कि अपने दुश्मन का हमें हमेशा पता रहता है, लेकिन प्रेम में भ्रम की स्थिति रहती ही है...क्योंकि आप नहीं समझ पाते कि आप जिससे प्रेम का इजहार कर रहे हैं वह आपसे ही प्रेम करता है या कहीं और एंगेज है. इसलिए हमारे लव रूम में भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है.

अगले लोक सभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी किस राज्य में किसके साथ गठबंधन करेगी और किन-किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी यह अभी तक स्पष्ट क्यों नहीं हो पाया है?

मैं तो अभी तक अपना ही गठबंधन तय नहीं कर सका कि किसके साथ करूंगा, फिर भला इतनी जल्दी पार्टी का गठबंधन कैसे तय कर दूंगा!... मैंने तो सभी पार्टियों को खुला निमंत्रण दे दिया है. अब पार्टियों को तय करना है कि कौन अपना हाथ मेरे हाथ में देना चाहता है!

अच्छा यह बताइए, आपने राष्ट्रीय स्यवंसेवक संघ की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुडसे क्या सोचकर की थी?

आपको अभी भी लगता है कि मैं सोचकर बोलता हूं!..मेरा काम सिर्फ रायता फैलाना है, उस रायते को समेटने के लिए कांग्रेस ने पूरी टीम तैयार की है. अब वे लोग मेरे हर तरह के फैलाए गए रायते को समेटने में परफेक्ट हो गए हैं.

राहुल जी, जैसे मोदी जी खुद को गुजरात दंगों के लिए जरा भी जिम्मेदार नहीं मानते, आपने भी कहा है कि 1984 के सिख दंगों के लिए कांग्रेस जिम्मेदार नहीं है. क्या आप दंगों के मामले में मोदी जी के ही रास्ते पर चल रहे हैं?

सिर्फ दंगे ही क्यों, हम तो हर तरह से उन्हीं के रास्ते पर हैं... या कह लो कि वे हमारे रास्ते पर हैं. देखिए राजनीति कोई किसी भी नाम पर करे, रास्ते और मंजिलें सबकी एक ही होती हैं.

क्या मतलब?

मेरी इस धार्मिक यात्रा और कांग्रेस को मुस्लिमों की पार्टी बताने जैसे बयानों से भी आपको अंदाज नहीं हो रहा कि हम सबके दांत एक जैसे ही हैं! मेरा कहने का मतलब है कि राजनीति में सारी पार्टियों के खाने के दांत एक जैसे ही होते हैं... हमारे दांतों में फर्क तो जनता और आप लोग अपनी तसल्ली के लिए पैदा कर लेते हैं.