सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामले में आरोपितों की तत्काल गिरफ्तारी का एक बार फिर रास्ता खोल दिया है. इससे पहले बीते साल शीर्ष अदालत ने इस कानून के तहत पीड़ित महिला के पति और ससुराल वालों की तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. साथ ही, इन्हें अग्रिम जमानत लेने का भी विकल्प दिया गया था. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस हालिया फैसले में अग्रिम जमानत को तो जारी रखा है लेकिन, इन मामलों में परिवार कल्याण समिति की किसी भी भूमिका को खत्म कर दिया है.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम फैसला सुनाया. उसने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायण को केरल पुलिस द्वारा बेवजह गिरफ्तार और परेशान किए जाने के एवज में 50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया. यह खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. शीर्ष न्यायालय ने मुआवजे का आदेश देने के साथ ही न्यायाधीश डीके जैन की अध्यक्षता में एक कमेटी भी गठित की है. यह कमेटी नारायण को फंसाने के मामले में केरल पुलिस के तत्कालीन अफसरों की भूमिका की जांच करेगी. इस कमेटी के लिए केंद्र और केरल सरकार भी अपनी-अपनी तरफ से सदस्य नियुक्त करेगी.

कुष्ठ रोगियों को दिव्यांग का दर्जा, आरक्षण सहित अन्य लाभ

कुष्ठ रोगियों को मुख्यधारा में लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट बड़ा फैसला लिया है. नवभारत टाइम्स की खबर की मानें तो अब इन्हें दिव्यांगों का दर्जा दिया जाएगा. साथ ही, उन्हें दिव्यांग कोटे में आरक्षण का फायदा भी दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र के साथ सभी राज्यों को इसके लिए अधिसूचना जारी करने और कुष्ठ रोगियों को दिव्यांगता का प्रमाणपत्र देने का आदेश दिया. वहीं, शीर्ष न्यायालय ने सभी कुष्ठ रोगियों को बीपीएल राशनकार्ड मुहैया कराने का भी निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि इन मरीजों को मुफ्त दवाएं मिलें और इनके साथ किसी तरह का भेदभाव न हो. इससे पहले केंद्र सरकार ने भी कुष्ठ रोग के मरीजों के साथ भेदभाव को अपराध की श्रेणी में शामिल किया था.

यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व टेरी प्रमुख आरके पचौरी के खिलाफ आरोप तय

दिल्ली स्थित द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के पूर्व प्रमुख आरके पचौरी की यौन उत्पीड़न मामले में मुश्किलें बढ़ती हुई दिख रही है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक साकेत स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट चारू गुप्ता की अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं और मुकदमा चलाने की अनुमति भी दे दी है. हालांकि, कोर्ट ने आरके पचौरी को कुछ राहत देते हुए कुछ आपराधिक धाराओं से मुक्त कर दिया है. इससे पहले टेरी के पूर्व प्रमुख पर फरवरी, 2015 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. इसके बाद 21 मार्च, 2015 को उन्हें जमानत दे दी गई थी. हालांकि, इसके एक साल बाद मार्च, 2016 में दिल्ली पुलिस ने 1400 से अधिक पन्नों के आरोपपत्र में कहा था कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं.

आदिवासी समुदाय अन्यों के मुकाबले विकास के कई मानकों पर काफी पीछे

आजादी के सात दशक बाद भी देश में आदिवासी समुदाय अन्यों के मुकाबले कई मोर्चों पर निचले स्तर पर है. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक आदिवासियों की जिंदगी अन्य तबकों की तुलना औसतन तीन साल कम होती है. साथ ही, इनमें कुपोषण, बच्चे के जन्म के वक्त वजन कम होना और इनके लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव दिखाई देता है. इसके अलावा यह समुदाय मलेरिया, टीबी और लेप्रोसी जैसे बीमारियों से अधिक प्रभावित होता है. बताया जाता है कि आदिवासी समुदाय की 15 से 19 साल के बीच की लड़कियों का वजन काफी कम है. वहीं, केवल 70 फीसदी मामलों में ही आदिवासी महिलाएं अस्पताल में बच्चे को जन्म दे पाती हैं.

दिल्ली : लापरवाही से सुश्रुत ट्रामा अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मरीज के जख्मों में कीड़े पड़े

दिल्ली स्थित सुश्रुत ट्रामा अस्पताल में मरीज की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने का मामला सामने आया है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक अस्पताल के आईसीयू में भर्ती 53 वर्षीय हरिचंद की पर्याप्त देखभाल न होने की वजह से उनके जख्मों में कीड़े पड़ गए. अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय बहल ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जांच की बात कही है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मरीज इस तरह का संक्रमण साथ लाते हैं.