गूगल ने आज प्रसिद्ध इंजीनियर सर एम विश्वेश्वरैया की 157वीं जयंती पर उन्हें डूडल बना कर याद किया है. उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप भारत में आज का दिन इंजीनियर दिवस के रूप में मनाया जाता है. विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 में मैसूर में एक तेलुगु परिवार में हुआ था. वे बेहतरीन इंजीनियर, शिक्षाविद् और सम्मानित राजनेता थे. 1912 से 1918 के बीच वे मैसूर साम्राज्य के दीवान भी रहे.

विश्वेश्वरैया की प्रारंभिक शिक्षा मैसूर में ही हुई. बाद में आगे की पढ़ाई के लिए वे बेंगलुरु आ गए. वहां उन्होंने सेंट्रल कॉलेज में दाखिला लिया था. आजादी के बाद देश को मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत थी. ऐसे में सर विश्वेश्वरैया ने अपनी योग्यता की बदौलत समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन्होंने कई जरूरी योजनाओं के तहत नदियों पर बांध बनाने, पुल तैयार करने और पीने के पानी की योजनाओं पर काम किया. जब कर्नाटक के मांड्या जिले में कृष्ण राजा सागर बांध का निर्माण शुरू हुआ तो विश्वेश्वरैया को उस काम के लिए मुख्य इंजीनियर की जिम्मेदारी दी गई थी. वहीं, हैदराबाद के बाढ़ सुरक्षा सिस्टम को तैयार करने में भी उन्होंने मुख्य इंजीनियर की भूमिका निभाई थी.

विश्वेश्वरैया ने मैसूर में लड़कियों के लिए अलग से हॉस्टल, पहला फर्स्ट ग्रेड कॉलेज और महारानी कॉलेज शुरू करवाने का काम किया. बेंगलुरु का जयानगर इलाका एशिया की सबसे सुनियोजित जगहों में गिना जाता है. इसका श्रेय भी विश्वेश्वरैया को जाता है, क्योंकि उन्होंने ही इसका डिजाइन तैयार करने और निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी. 1955 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. वहीं, समाज के लिए किए उनके कामों के लिए किंग जॉर्ज पंचम ने उन्हें नाइट कमांडर ऑफ ब्रिटिश इंडियन एंपायर से सम्मानित किया था.