राजद नेता तेजस्वी यादव ने फिर कहा है कि बड़े भाई तेज प्रताप के साथ उनका कोई मतभेद नहीं है. बीते मंगलवार को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की एक अहम बैठक में तेज प्रताप यादव की गैर हाजिरी और फिर गुरुवार को पार्टी में अपनी ‘अहम भूमिका’ बताए जाने वाले तेजस्वी यादव के बयान के बाद दोनों भाइयों के बीच अनबन की खबरों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया था.

आगामी आम चुनाव की तैयारियों को लेकर इसी हफ्ते मंगलवार को राबड़ी देवी की अध्यक्षता में आरजेडी की कोर समिति की एक बैठक हुई थी. इस बैठक में तेजस्वी यादव तो मौजूद थे पर तेज प्रताप यादव इसमें नहीं शामिल हुए थे. बाद में उनकी अनुपस्थिति का बचाव करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा था कि मथुरा यात्रा से लौटने के बाद तेज प्रताप थकान महसूस कर रहे थे इसलिए वे इस बैठक में नहीं शामिल हो पाए थे. खबरों के मुताबिक तेज प्रताप यादव ने पार्टी की पिछली कुछ बैठकों से भी अपनी दूरी बनाई हुई थी.

इस बीच तेज प्रताप यादव ने तेजस्वी यादव के साथ अनबन की अटकलों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और संघ के लोगों को जिम्मेदार ठहराया. साथ ही खुद को ‘बलराम’ और तेजस्वी को ‘कृष्ण’ बताते हुए उन्होंने आपस में किसी तरह के मतभेद से भी इनकार किया. इससे पहले गुरुवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान सवालिया लहजे में तेज प्रताप ने यह भी कहा था, ‘आरजेडी से कोई कैसे मुझे हाशिये पर पहुंचा सकता है जबकि खुद मेरे पिता पार्टी के मुखिया हैं?’

उधर, लालू प्रसाद यादव के जेल भेजे जाने के बाद पार्टी नेतृत्व का काम तेजस्वी यादव ही संभाल रहे हैं. इसके अलावा 2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी और जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) गठबंधन की जीत के बाद तेजस्वी यादव को बिहार का उप मुख्यमंत्री का पद भी सौंपा गया था. उस फैसले के बाद यही अंदाजा लगाया गया था कि तेज प्रताप से छोटा होने के बावजूद लालू प्रसाद यादव तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकारी बना सकते हैं.

तेजस्वी और तेज प्रताप यादव के बीच अनबन की अटकलों ने हाल में तब और जोर पकड़ा जब 10 अगस्त को पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर किए गए भारत बंद का तेजस्वी यादव ने तो समर्थन किया लेकिन तेज प्रताप यादव ने इससे अपनी दूरी बनाई. इसके अलावा तेजस्वी यादव ने हाल ही में जहां एससी-एसटी एक्ट का समर्थन करने की बात कही थी तो पार्टी विचारधारा से इतर जाते हुए तेज प्रताप ने सवर्ण गरीबों को आरक्षण दिए जाने के पक्ष में विचार दिया था.

इस बीच आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि तेज प्रताप और तेजस्वी के मतभेद बीच अनबन की खबरों पर विराम नहीं लगता तो आगामी आम चुनाव पर इसका विपरीत असर दिख सकता है. साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए भी दोनों भाइयों का एकजुट होकर काम करना जरूरी है.