कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि उनकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें हो रही हैं. शुक्रवार, 14 सितंबर को उन्होंने फिर ये आरोप दोहराए, लेकिन इस मर्तबा कुछ तथ्यों के साथ. उन्होंने कहा, ‘मुझे पता है कि कहां क्या चल रहा है. मैं हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा हूं. मुझे पता है कि उन लोगों (भाजपा की तरफ इशारा) को पैसे कौन दे रहा है. यह भी कि इस सब के लिए पैसे किस ‘किंगपिन’ (सरगना) के जरिए इकट्‌ठे किए जा रहे हैं. मुझे यह भी पता है कि विपक्ष ने 13 सितंबर (गणेश चतुर्थी पर) की तारीख सरकार गिराने के लिए तय की थी. लेकिन यह समयसीमा आगे बढ़ाकर दो अक्टूबर कर दी गई है. या फिर दशहरा महोत्सव के आसपास भी इसकी कोशिश हो सकती है. सरकार उन लोगों पर कानून के तहत कार्रवाई करेगी जो ग़ैरकानूनी तरीके से इस सबके लिए पैसे इकट्‌ठे कर रहे हैं.’

लेकिन कुमारस्वामी अपनी बात यहां ख़त्म करते इससे पहले ही उन पर कुछ स्वाभाविक सवाल दाग दिए गए. उनसे पूछा गया कि वे जिस किंगपिन का ज़िक्र कर रहे हैं, उसका नाम क्या है. लेकिन कुमारस्वामी ने उसका नाम बताने से साफ इंकार कर दिया. अलबत्ता कुछ इशारे ज़रूर किए. मसलन, ‘वह किंगपिन (जिसका उन्होंने उल्लेख किया) राज्य में लॉटरी के अवैध धंधे से जुड़ा है. साथ ही बृहत् बेंगलुरू महानगर पालिके (बीबीएमपी) में राज्य की भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान लगी आग की घटना में भी उसका हाथ रहा है.’ इसके अलावा उन्होंने एक और ऐसा ही संदर्भ-संकेत दिया. कुमारस्वामी ने कहा, ‘एक अन्य व्यक्ति सकलेशपुर के कॉफी बागान का मालिक (कॉफी प्लांटर) है. उसने कुछ समय पहले ही अपनी पत्नी और बेटे-बेटी को गोली मार दी थी.’ हालांकि बार-बार पूछने पर भी इससे ज़्यादा उन्होंने कुछ नहीं बताया.

हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव ने ज़रूर कुछ नाम बताए जो पहले भी ऐसे ही आरोपों और ख़बरों के सिलसिले में सामने आ चुके हैं. उनका कहना था, ‘भाजपा की ओर से उसके प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा तथा राज्य सभा सदस्य प्रभाकर कोरे लगातार कुमारस्वामी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. इन दोनों की देखरेख में भाजपा विधायक सतीश रेड्डी, एसआर विश्वनाथ, अश्वथ नारायण और सीपी योगेश्वर हमारी पार्टी के विधायकों को प्रलोभन देकर अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं.’ हालांकि दिनेश गुंडूराव द्वारा ये नाम बताए जाने के बावज़ूद उनकी बातों पर किसी का ज़्यादा ध्यान नहीं गया क्योंकि ये नाम लगातार सुर्ख़ियों में आ ही रहे हैं. मसलन- अभी पिछले सप्ताह ही ख़बर आई कि कर्नाटक कांग्रेस के दो बड़े नेता सतीश और रमेश जरकीहोली पार्टी और सरकार से नाराज़ हैं.

जरकीहोली भाइयों में सतीश नगरीय निकाय प्रशासन विभाग के मंत्री हैं. जबकि रमेश विधायक. बताया जाता है कि पार्टी के एक अन्य असरदार नेता डीके शिवकुमार से दाेनों भाइयों को दिक्कत है. शिवकुमार इस वक़्त कुमारस्वामी सरकार में सिंचाई एवं जलसंसाधन मंत्री हैं. वे ख़ुद कई बार मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जता चुके हैं. इसके चलते उनकी उत्तरी कर्नाटक के बेलगावी जिले की राजनीति में दख़लंदाज़ी बढ़ गई है. जबकि यह क्षेत्र जरकीहोली भाइयों के असर वाला माना जाता है. ख़ुद सतीश जरकीहोली ने इसे माना है. उधर, रमेश तो कांग्रेस से इस्तीफे की धमकी तक दे चुके हैं. इन दोनों भाइयाें के पास 14 अन्य विधायकों का समर्थन बताया जाता है. इसके बाद भाजपा नेता प्रभाकर कोरे खुले तौर पर कह चुके हैं कि अगर जरकीहोली भाई उनकी पार्टी में आते हैं तो इसका स्वागत किया जाएगा. यानी गुंडूराव के आरोपों में नया कुछ नहीं है.

तो फिर नया क्या? निश्चित तौर पर वही जो कुमारस्वामी ने कहा है. संभव है उन्होंने डीके शिवकुमार और जरकीहोली भाइयों के बीच चल रहे झगड़े से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के आरोप लगाए हों. लेकिन यहीं यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वे सरकार के मुखिया हैं. मुख्यमंत्री हैं. इस हैसियत से उन्होंने जो भी कहा और जो तथ्य सामने रखे उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता. लिहाज़ा यह जानना भी उतना ही ज़रूरी हो जाता है कि जिनके बारे में मुख्यमंत्री ने संकेत दिए हैं, वे कौन लोग हैं? और उनके भाजपा या उनके नेताओं से क्या संबंध हैं? सत्याग्रह ने इन्हीं सवालों की पड़ताल की तो दो-तीन नाम सामने आए. हालांकि इनमें एक नाम से जुड़े दावे पर संदेह का आधार भी बनता दिखा. लिहाज़ा सबसे पहले शुरूआत इसी से. फिर अगली खोजबीन उस नाम के बताल्लुक़, जिसे लेकर कुमारस्वामी के दावे में सच्चाई नज़र आती है.

मुख्यमंत्री के एक दावे पर संदेह

एचडी कुमारस्वामी ने उनकी सरकार गिराने की कोशिश करने वालों की तरफ एक संकेत दिया था सकलेशपुर (हासन जिले) के कॉफी प्लांटर का. इस बारे में सत्याग्रह की पड़ताल में एक नाम उभरकर सामने आया. यह नाम है एचके गणेश का. गणेश लगभग 75 करोड़ रुपए की संपत्ति का मालिक है. इस संपत्ति में कुछ समय पहले तक सकलेशपुर में स्थित कॉफी का एक बागान भी शामिल था. लेकिन बताया जाता है कि बेंगलुरू में प्रॉपर्टी का कारोबार शुरू करने के लिए उसने कॉफी बागान बेच दिया. साथ ही उसने बाज़ार से लगभग 25 करोड़ रुपए का कर्ज़ भी उठाया. लेकिन उसका यह कारोबार जम पाता उससे पहले ही नवंबर 2016 में नोटबंदी का ऐलान हो गया. बताते हैं कि इससे गणेश का पूरा गणित गड़बड़ा गया. लिए गए कर्ज़ पर ब्याज़ के बढ़ते दबाव को वह बर्दाश्त नहीं कर पाया. इस दबाव में उसने एक दुस्साहसिक कदम उठा लिया.

एचके गणेश, अपने बीवी-बच्चों के साथ.
एचके गणेश, अपने बीवी-बच्चों के साथ.

इसी साल जून की बात है. खबर आई कि बेंगलुरू के जयानगर में रहने वाले 49 वर्षीय गणेश ने अपनी 42 वर्षीय पत्नी सहाना की गोली मार कर हत्या कर दी. इसके बाद वह अपने तीनों बच्चाें को (15 साल का सुमित, 12 साल का सिद्धार्थ और नौ साल की गोद ली हुई बेटी साक्षी) लेकर घर और शहर छोड़कर भाग गया. रास्ते में उसने साक्षी और सिद्धार्थ को भी गोली मारी मगर बच्चों को कुछ होता इससे पहले ही उसे ग़िरफ़्तार कर लिया गया. फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है. पुलिस के मुताबिक गणेश कर्ज़ चुकाने के लिए संपत्ति बेचना चाहता था. लेकिन इस रास्ते में दो दिक्कतें थीं. पहली- नोटबंदी की वज़ह से उसे संपत्ति के पूरे दाम नहीं मिल रहे थे. दूसरा- पत्नी संपत्ति बेचने से लगातार मना कर रही थी. इसलिए उसने मुंबई के पुलिस अफसर हिमांशु रॉय की तरह पत्नी और बच्चों को मारकर ख़ुद आत्महत्या करने की तैयारी की हुई थी.

इस तरह उपलब्ध पृष्ठभूमि में यह समझना ख़ासा मुश्किल है कि कर्ज़ के बोझ से क़रीब-क़रीब मानसिक संतुलन खो चुका और जेल में क़ैद कोई व्यक्ति सरकार गिराने-बनाने के खेल में कैसे शामिल हो सकता है? इस सवाल के इतर गणेश से जुड़ी यह जानकारी भी मामले को अलहदा बनाती है कि वह प्रसिद्ध वायलिनवादक (स्वर्गीय) एचवी कृष्णमूर्ति का बेटा है, पिता के संगीत विद्यालय को संभालता है, ख़ुद संगीतकार है और संगीत सिखाता है. साथ ही वह पिता के साथ कई संगीत सभाओं में अपना हुनर भी दिखा चुका है. इस सबके बावज़ूद भी मुख्यमंत्री ने अगर गणेश की ही तरफ इशारा किया है तो अपने इस संकेत का आधार-प्रमाण वे ही दे सकते हैं और वह भी जब उनकी मर्ज़ी होगी.

कुमारस्वामी का दूसरा दावा सच के ज़्यादा क़रीब लगता है

मुख्यमंत्री ने दूसरा इशारा किया लॉटरी का अवैध कारोबार करने वाले किसी सरगना का. मुख्यमंत्री का यह संकेत सच के क़रीब लगता है और कर्नाटक सहित देश के कई हिस्सों में लॉटरी का अवैध कारोबार करने वाले दो कुख्यात लोगों पर जाकर टिकता है. इनमें एक है परि राजन. यह कर्नाटक के कोलार क्षेत्र से ताल्लुक़ रखता है. राज्य में 2007 से लॉटरी पर प्रतिबंध है. लेकिन सत्ता प्रतिष्ठानों में इसका दख़ल इतना रहा कि राजन सालों तक लॉटरी का अवैध कारोबार करता रहा. इस बल पर उसने कर्नाटक में ‘लॉटरी किंगपिन’ की हैसियत पा ली. इस बीच 2008 से 2013 तक राज्य में भाजपा की सरकार रही. फिर 2013 के चुनाव के बाद कांग्रेस सत्ता में आ गई. लेकिन अब तक भी राजन की सेहत पर आंच नहीं आई. हालांकि 2015 में एक कन्नड़ न्यूज़ चैनल ने उसके कबूलनामे का स्टिंग ऑपरेशन प्रसारित कर उसका भांडा फोड़ किया था.

परि राजन
परि राजन

ख़ुलासा होने के बाद बेंगलुरू के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार को राजन से संबंध रखने के आरोप में निलंबित किया गया. अन्य पुलिस अफसर भी निलंबित हुए. ख़बर है कि 55 वर्षीय राजन फिलहाल न्यायिक हिरासत में है. उसके मामले की जांच अब तक चल ही रही है. इस जांच के दौरान एक दूसरा बड़ा नाम भी सामने आया- सैंटियागो मार्टिन का. वह चेन्नई से संचालित मार्टिन लॉटरी एजेंसीज़ का मालिक है. इस वक़्त वह कहां है, इस बारे में तो जानकारी नहीं मिली. मगर पिछले साल केरल में उसकी गतिविधियां चर्चा में आई थीं. वहां इसकी फर्म तीस्ता डिस्ट्रीब्यूटर्स मिज़ोरम लॉटरी के वितरण का काम देखती है. इसने आठ अगस्त 2017 को लॉटरी ड्रॉ का विज्ञापन दिया था. लेकिन यह ड्रॉ मिज़ोरम सरकार की ओर से अधिकृत नहीं था. इसलिए मामला केरल के वाणिज्य कर विभाग के जांच के दायरे में आ गया.

सैंटियागो मार्टिन
सैंटियागो मार्टिन

बहरहाल सैंटियागो मार्टिन द्वारा लॉटरी टिकटों की बिक्री की धोखाधड़ी का मामला सिर्फ केरल तक सीमित नहीं है. बताया जाता है कि कर्नाटक में भी परि राजन असल में मार्टिन के लिए ही काम करता था. राजन को मार्टिन दाहिना हाथ माना जाता है. बल्कि कहा तो यहां तक जाता है कि अगर राजन लाॅटरी गिरोह का किंगपिन है तो मार्टिन गॉडफादर. मार्टिन अस्सी के दशक में म्यांमार से भारत आया था. बताते हैं कि वहां पर वह मज़दूरी किया करता था. लेकिन वहीं उसने दो अंकों वाली लॉटरी का तौर-तरीका भी विकसित कर लिया था. फिर अपनी किस्मत आज़माने एक रोज वह भारत आ गया. पूर्वोत्तर से होते हुए उसने दक्षिण में ठिकाना बनाया और वह आज देश के विभिन्न राज्यों में क़रीब 7,000 करोड़ रुपए का कारोबार खड़ा कर चुका है. लॉटरी का मामला तो यूं हो गया है कि लाेग अब इसे ही ‘लॉटरी मार्टिन’ के नाम से जानने लगे हैं.

मार्टिन के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी के 32 से अधिक मामले हैं. इनमें 4,500 करोड़ रुपए से अधिक का एक मामला तो केरल में ‘सिक्किम लॉटरी’ की धोखाधड़ी से ही संबंधित है. उसके राजनीतिक संपर्क भी खासे ऊंचे हैं. बताते हैं कि जब भी वह नेपाल और भूटान जाता है तो वहां उसका शाही स्वागत होता है. भारत में भी वह तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी- डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के प्रमुख (अब दिवंगत) एम करुणानिधि से सीधे जुड़ा रहा है. करुणानिधि की पटकथा वाली फिल्म ‘इलइगनन’ में मार्टिन ने 2011 में 20 करोड़ रुपए लगाए थे. फिल्म का निर्माण भी उसने ख़ुद ही किया था. केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के दैनिक अख़बार ‘देशाभिमानी’ को उसने दो करोड़ रुपए की मदद दी. इससे जुड़े फ़र्ज़ीवाड़े की जांच सीबीआई कर रही है. जांच के दौरान उसे ग़िरफ़्तार भी किया गया. मार्टिन आठ महीने से ज़्यादा जेल में रह चुका है.

बताते हैं कि सीबीआई जांच के चलते मार्टिन और उसके परिवार ने बीते कुछ सालों में भाजपा से भी नज़दीकी बढ़ाई है. उसकी पत्नी का नाम लीमा रोज़ मार्टिन है. वह तमिलनाडु की इंधिया जननायक कांची (आईजेके) की उपमहासचिव रही हैं. आईजेके 2014 के लोक सभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बनी थी. तभी इस पार्टी पदाधिकारी की हैसियत से लीमा कोयंबटूर की चुनाव रैली के दौरान नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर भी दिखी थीं. लीमा के बड़े बेटे का नाम चार्ल्स जोस है. चार्ल्स 2015 में भाजपा में शामिल हुए थे. तमिलनाडु के पार्टी प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि भी की थी. मार्टिन ग्रुप ऑफ कंपनीज़़ के प्रबंध निदेशक चार्ल्स परिवार का कारोबार संभालते हैं. यह कंपनी 2011 में भी चर्चा में रही थी जब बीबीएमपी के दो अहम हिस्सों में जुलाई और नवंबर में रहस्यमयी आग लगी थी. उसमें घपले-घोटाले का काफी रिकॉर्ड जल गया था.

इस तरह कड़ी-कड़ी जोड़कर एक तस्वीर तो बनती है जिसमें मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के आरोपों का प्रतिबिंब नज़र आता है.