मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने भारत में चुनाव के दौरान काले धन के उपयोग से निपटने के लिए मौजूदा कानूनों को ‘अपर्याप्त’ बताया है. शनिवार को एक कार्यक्रम में ‘भारत के चुनावी लोकतंत्र की चुनौतियां’ विषय पर बोलते हुए ओपी रावत ने कैम्ब्रिज एनालिटिका का जिक्र करते हुए कहा कि इधर-उधर से डेटा जमा करने और फेक न्यूज के बढ़ते खतरे से जनमत प्रभावित होने की चिंता भी बढ़ गई है.

कैंब्रिज एनालिटिका पर आरोप है कि उसने फेसबुक के पांच करोड़ यूजर्स से जुड़ी जानकारियां अवैध तरीके से हासिल की थीं. इनमें साढ़े पांच लाख से ज्यादा भारतीय भी हैं. ब्रिटेन स्थित इस फर्म पर इन जानकारियों का इस्तेमाल कर कई देशों के चुनावों को प्रभावित करने का भी आरोप है.

चुनावों में काले धन के इस्तेमाल पर मुख्य चुनाव आयुक्त का कहना था कि मौजूदा कानूनी ढांचा भारत में साफ-सुथरे चुनाव कराने के लिए पूरी तरह से कारगर नहीं हैं. चुनावों में सरकार की तरफ से वित्तीय सहायता (स्टेट फंडिंग) के मुद्दे पर बोलते हुए ओपी रावत ने कहा कि चुनावों में धनबल पर प्रभावी तरीके से नियंत्रण करना जरूरी है क्योंकि जब तक चुनावों के लिए पैसे के ऐसे स्रोत मौजूद रहेंगे, तब तक स्टेट फंडिंग जैसी पहल अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर सकती.