शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) की तरफ से अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में बायोगैस प्लांट लगाए जाने के निर्णय के बाद अब दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (डीएसजीएमसी) ने दिल्ली के 10 गुरुद्वारों में बायोगैस प्लांट लगाने का फैसला किया है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक इस योजना के शुरू होने के बाद इन गुरुद्वारों के रसोईघरों में लंगर के लिए तैयार किया जाने वाला खाना बायोगैस प्लांट से मिलने वाली स्वच्छ ऊर्जा से तैयार किया जाएगा. इससे गुरुद्वारों को कचरा निस्तारण में भी मदद मिलेगी क्योंकि फल व सब्जियों के छिलकों के अलावा रसोईघरों से निकलने वाले दूसरे कचरे को बायोगैस के जरिये ईंधन में तब्दील किया जा सकेगा.

डीएसजीएमसी के अध्यक्ष सरदार मंजीत सिंह जीके के मुताबिक गुरुद्वारों में बायोगैस प्लांट लगाने संबंधी फैसला ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत किया गया है. उनका यह भी कहना है, ‘मौजूदा समय में गुरुद्वारों के रसोईघरों में खाना बनाने के लिए पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) का इस्तेमाल किया जा रहा है. नए प्लांट लगने से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी और ईंधन की लागत में भी कमी आएगी. साथ ही सबसे बड़ी बात यह है कि सिखों की इस पवित्र संस्था की तरफ से पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया जा सकेगा.’

बायोगैस प्लांट लगाए जाने की शुरुआत गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब और गुरुद्वारा बंगला साहिब से की जााएगी. दिल्ली के इन दोनों ऐतिहासिक गुरुद्वारों से बड़े स्तर पर बायोडीग्रेडेबल (प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाला) कचरा निकलता है. डीएसजीएमसी के एक सदस्य के मुताबिक इन दोनों गुरुद्वारों में इसी साल अक्टूबर से बायोगैस प्लांट की सुविधा शुरू होने की उम्मीद है. इसके बाद 2019 के अंत तक चरणबद्ध तरीके से अन्य गुरुद्वारों में ये प्लांट लगाए जाएंगे.