इसी साल अप्रैल के महीने में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर हुई एक दुर्घटना में 13 स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी. उस दुर्घटना को गंभीरता से लेते हुए तब रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड ने अपने प्रमुख रेल मार्गों पर मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग को खत्म करने का फैसला किया था. द इंडियन एक्सप्रेस के मु​ताबिक रेलवे ने बीते पांच महीनों के दौरान इस दिशा में काफी तेजी से काम किया है.

रेलवे के वे रूट जिन पर ट्रनों को 130 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने की इजाजत है, उन पर से मानव रहित क्रॉसिंग पूरी तरह खत्म कर दी गई हैं. इन क्रॉसिंग पर या तो पुल बना दिए गए हैं या फिर इन पर कर्मचारियों की तैनाती हो गई है. आंकड़ों के मुताबिक इस महीने के आखिर तक देश में करीब 600 मानव रहित क्रॉसिंग ही शेष रह जाएंगी.

भारतीय रेल के एक अधिकारी का कहना है कि अप्रैल, 2018 के दौरान रेल नेटवर्क में मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग की संख्या 3,470 हुआ करती थी. इनमें से ज्यादातर क्रॉसिंग ऐसी थीं जिन पर ट्रेनों की आवाजाही और गति भी ज्यादा नहीं थी. अब तक ऐसी 1300 क्रॉसिंग्स को खत्म किया गया जा चुका है. इसके अलावा जिन मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही बेहद मामूली है उन पर भी इन क्रॉसिंग को जल्दी ही खत्म कर दिया जाएगा.

इस दौरान उत्तर-पूर्व की फ्रंटीयर रेलवे ने भी अपने रूटों को मानव रहित क्रॉसिंग से मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है. मध्य, पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पूर्व-मध्य और पश्चिम-मध्य रेलवे पहले ही ऐसा कर चुके हैं. उधर, मानव रहित क्रॉसिंगों पर इस साल हुई दुर्घटनाओं में अब तक 16 जानें जा चुकी हैं जबकि ऐसी दुर्घटनाओं में साल 2011-12 के दौरान सबसे ज्यादा 204 लोग मारे गए थे.