देश में बड़े स्तर पर फैली बेरोजगारी और योग्यता के मुताबिक रोजगार न मिल पाने से जुड़ा एक और उदाहरण सामने आया है. एनडीटीवी के मुताबिक तेलंगाना में ग्राम राजस्व अधिकारी (वीआरओ), जो एक क्लर्क ग्रेड की पोस्ट है, के लिए 700 रिक्तियों के जवाब में दस लाख लोगों ने आवेदन किया है. इनमें से कई लोग पीएचडी और एमफिल कर चुके है जबकि इस पद पर आवेदन के लिए बारहवीं कक्षा में उत्तीर्ण होना न्यूनतम योग्यता है. तेलंगाना राज्य लोक सेवा आयोग (टीएसपीएससी) के मुताबिक कुल आवेदनकर्ताओं में 372 लोग पीएचडी और 539 लोग एमफिल कर चुके हैं. इसके अलावा डेढ़ लाख लोग पोस्ट ग्रेजुएट हैं. साथ ही आवेदनकर्ताओं में हजारों युवा ऐसे हैं जो इंजीनियरिंग एवं अन्य विषयों में ग्रेजुएट हैं.

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की पढ़ाई करने के बाद इस पद के लिए आवेदन करने वाले प्रशांत एनडीटीवी की इस रिपोर्ट में कहते हैं, ‘इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के बावजूद मुझे केवल बीपीओ (कॉल सेंटर) में नौकरी मिल रही है और वह भी 15 हजार रुपयों की. सरकारी नौकरी में सैलरी अच्छी होने के साथ-साथ एक सुरक्षित करियर भी मिलता है.’

टीएसपीएससी के अध्यक्ष घंटा चक्रपाणी इस मामले में हैरानी जताते हुए कहते हैं, ‘मुझे नहीं लगता कि संयुक्त आंध्र प्रदेश या पूरे देश में ऐसा कहीं होता होगा, जहां इतने अधिक योग्य और पढ़े-लिखे युवा एक निम्न स्तर की नौकरी के लिए इतनी बड़ी संख्या में आवेदन कर रहे हैं.’ हालांकि वे इसका कारण प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को ही बताते हुए कहते हैं, ‘तेलंगाना उन कुछ राज्यों में से है जहां शिक्षा व्यवस्था काफी दुरुस्त है. इसके अलावा पिछले 15 सालों से सरकार द्वारा छात्रों को मिलने वाली फीस माफी की सुविधा के कारण हर साल काफी ज्यादा संख्या में इंजीनियर एवं अन्य ग्रेजुएट युवा बाजार में नौकरियों के लिए उतर रहे हैं. इसके चलते हमें इस परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा है.’

हालांकि तेलंगाना में वीआरओ की इस पोस्ट के लिए ज्यादा पढ़े-लिखे युवाओं तक में आकर्षण होने की सिर्फ यही एक वजह नहीं है. कुछ सामाजिक विश्लेषकों के मुताबिक भले ही वीआरओ एक छोटा पद लगता हो, लेकिन सरकार का यह कर्मचारी अलग-अलग तौर-तरीकों से हर माह दो लाख रुपये तक कमा लेता है और यही वजह है कि युवा इस पद पर आना चाहते हैं.