केंद्र सरकार ने बुधवार को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 के अध्यादेश को मंजूरी दे दी है. इसके तहत तीन तलाक को दंडनीय अपराध माना गया है. इस बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक को गैर कानूनी और असंवैधानिक करार दिया था, लेकिन इसके बाद भी ये बेरोकटोक जारी है. केंद्र सरकार इस बिल को मानसून सत्र के दौरान संसद से पारित कराने में असफल रही थी जिसके बाद अब उसने इस मामले में अध्यादेश लाने का रास्ता चुना है.

इस विधेयक के अनुसार एक साथ तीन बार ‘तलाक’ शब्द बोलकर, लिखकर या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजकर तलाक देने को अपराध माना गया है. इस कानून का उल्लंघन करने वाले पुरुष को तीन साल जेल की सजा का भी प्रावधान है. दिसंबर में लोक सभा से इस विधेयक को मंजूरी मिल गई थी, लेकिन अभी यह राज्यसभा में अटका हुआ है. हालांकि मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने एक संशोधन करते हुए इसमें जमानत देने का प्रावधान जोड़ा था. इसके तहत इन मामलों में मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा. कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा केंद्र सरकार के अध्यादेश में महिला के पति को जेल हो जाने के बाद गुजारा भत्ते का प्रावधान नहीं है इसलिए उसे लगता है कि मोदी सरकार की रुचि मुस्लिम महिलाओं को न्याय देने में नहीं है. वो केवल राजनीति कर रही है.