जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग. चंदन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग.

रहीमदास जी का लिखा यह दोहा संतों यानी अच्छे गुण वाले लोगों की खासियत बताता है. इसे समझाने के लिए उन्होंने सांप और चंदन का उदाहरण दिया है. इस दोहे के अर्थ की बात करें तो यह कह रहा है कि बुरे लोगों की संगत कभी अच्छे लोगों में खामियां पैदा नहीं कर सकती, ठीक वैसे ही जैसे चंदन के पेड़ से लिपटे सांप कभी उसे जहरीला नहीं कर पाते. इस दोहे से मिलने वाली सीख तो अपनी जगह सही है, लेकिन इससे अलग सांप-चंदन की संगत का यह उदाहरण एक नया ही सवाल पैदा करता है और वो यह कि क्या सच में चंदन के पेड़ में हमेशा सांप लिपटे रहते हैं. चलिए, सिर-पैर के सवाल में इस बार चंदन और सांप की इसी संगत की पड़ताल करते हैं.

इस सवाल से जुड़ी पहली और सीधी जानकारी यही है कि सच में सांप अक्सर चंदन के पेड़ को अपना ठिकाना बनाते हैं और केवल चंदन ही नहीं, रजनीगंधा या चमेली जैसे कई खुशबूदार पेड़ों पर या उसके आसपास रहना पसंद करते हैं. ऐसा माना जाता है कि इन पेड़ों की खुशबू सांपों को आकर्षित करती है. यह बात बहुत हद तक सही भी है.

सांपों में सूंघने की शक्ति होती है, यह बात विज्ञान द्वारा प्रमाणित है, बल्कि कहना चाहिए कि सांप सबसे अच्छी घ्राणशक्ति वाले जीवों में से एक है. ये न केवल अपने नोस्ट्रिल्स से बल्कि जीभ के ऊपरी हिस्से से भी सूंघ सकते हैं. यानी अगर अगली बार कोई सांप आपको जीभ लपलपाता दिखे तो समझिएगा कि वह आपको डराने की नहीं बल्कि सूंघने की कोशिश कर रहा है! सांप चंदन या चमेली तक सूंघकर ही पहुंचता है, हालांकि इन पेड़ों-झाड़ियों तक खुशबू के लिए आना उसका एकमात्र उद्देश्य नहीं होता.

इसे समझने के लिए सांप के बारे में थोड़ा और जान लेते हैं. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उत्तरी-दक्षिणी ध्रुवों और आयरलैंड-न्यूजीलैंड जैसे कुछ देशों को छोड़ दें तो सांप दुनिया के लगभग हर देश में पाए जाते हैं. पृथ्वी पर आए शुरूआती जीवन का हिस्सा रहा यह जंतु आमतौर पर ठंडी और अंधेरी जगहों पर रहना पसंद करता है और इसकी वजह है इसका एक्टोथर्म होना. एक्टोथर्म यानी कि ऐसे जीव जो अपने शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए बाहरी चीजों पर निर्भर रहते हैं. इस श्रेणी में सांप, कछुआ, घड़ियाल और छिपकली जैसे जीव आते हैं.

इस तरह के जीव हमेशा बिल, झाड़ी, चट्टानों के नीचे या पानी में और पानी के आसपास पाए जाते हैं. अब चूंकि चंदन, रजनीगंधा और चमेली का तापमान बाकी पेड़-पौधों की तुलना में थोड़ा कम होता है और यह मुख्य वजह है कि ये सांपों को खासतौर पर आकर्षित करते हैं. इसके अलावा जीव-विज्ञानी मानते हैं कि इनमें खुशबू होने की वजह से इन्हें खोजना अपेक्षाकृत आसान होता है, इसलिए सांप इन तक आसानी से पहुंचकर अपना बसेरा बना लेते हैं.