रफाल विमान सौदे को लेकर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का बयान आज के अधिकतर अखबारों के पहले पन्ने पर है. फ्रांस्वा ओलांद के मुताबिक भारत सरकार ने ही फ्रांस सरकार से इस सौदे के भारतीय साझेदार के रूप में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस के नाम का प्रस्ताव देने को कहा था. पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ‘भारत सरकार ने जिस ग्रुप का नाम दिया, उससे दसॉ (रफाल बनाने वाली कंपनी) ने बातचीत की. उसने अनिल अंबानी से संपर्क किया. हमारे पास कोई विकल्प नहीं था.’ वहीं, इससे पहले मोदी सरकार ने कहा था कि यह समझौता दो कंपनियों के बीच एक व्यावसायिक समझौता था जिसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी.

नरेंद्र मोदी के शासन में गुजरात सरकार के 19 विभागों ने खर्च का ब्योरा नहीं दिया

गुजरात में नरेंद्र मोदी के शासन में सरकारी धन के खर्च के इस्तेमाल में गड़बड़ी का मामला सामने आया है. राजस्थान पत्रिका ने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि साल 2001-02 से 2015-16 के दौरान 19 विभागों के कई मदों में खर्च 2,140 करोड़ रुपये का ब्योरा नहीं दिया है. साथ ही, 1441 करोड़ रु के गबन के 158 मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की गई है. मई, 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी राज्य की कमान संभाल रहे थे. बताया जाता है कि गुजरात के वित्तीय नियम-1971 और जनरल फाइनेंशियल रूल्स-2005 के मुताबिक वित्तीय वर्ष खत्म होने के अधिकतम 12 महीने के भीतर खर्च का ब्योरा जमा करना होता है. ऐसा न होने पर आगे रकम न देने का प्रावधान है.

तय मानकों पर परीक्षा न करवाने के आधार पर यूपीएससी परीक्षा के नतीजे खारिज

केंद्रीय प्रशासनिक प्राधिकरण (कैट) ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की एक परीक्षा के नतीजे को खारिज कर दिया है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक साल 2013 में यह परीक्षा श्रम और रोजगार मंत्रालय के लिए आयोजित की गई थी. इस परीक्षा के नतीजे में 57 उम्मीदवारों का अंतिम रूप से चयन किया गया था. प्राधिकरण ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि परीक्षा प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मानकों के अनुरूप नहीं है. बताया जाता है कि संबंधित परीक्षा में साक्षात्कार के लिए 50 फीसदी अंक निर्धारित थे जबति शीर्ष अदालत के मुताबिक किसी परीक्षा में इसके लिए 15 फीसदी से अधिक अंक निर्धारित नहीं किए जा सकते. कैट ने यूपीएससी को तय मानकों के आधार पर परीक्षा के नतीजे को फिर से जारी करने का भी आदेश दिया है.

मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति को हटाने की मांग कर रहे 89 छात्रों और छह शिक्षकों को हिरासत में लिया गया

इंफाल स्थित मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति को हटाने की मांग कर रहे 89 छात्रों और छह शिक्षकों को हिरासत में ले लिया है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने गुरुवार देर रात इस कार्रवाई को अंजाम दिया. बताया जाता है कि इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए. अखबार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि उप-कुलपति केवाई सिंह द्वारा छात्रों के खिलाफ पुलिस में शिकायत के बाद यह कार्रवाई की गई. फिलहाल विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है. साथ ही, किसी को भी भीतर आने नहीं दिया जा रहा है. घटना के बाद राजधानी इंफाल में इंटरनेट सेवा बंद है.

ऑनलाइन दवाओं की ब्रिकी का विरोध, सरकार पर भेदभाव का आरोप

दवा दुकानदारों ने ऑनलाइन दवा की बिक्री के विरोध में 28 सितंबर को बंद का ऐलान किया है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक उनका कहना है कि सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है और ऑनलाइन कंपनियां ड्रग एक्ट का खुला उल्लंघन कर रही हैं, फिर भी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही. देश में दवा विक्रेताओं और वितरकों के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (एआईओसीडी) ने भी बंद का समर्थन किया है. इसके अध्यक्ष जेएस शिंदे ने बताया कि इस बारे में केंद्र सरकार, संबंधित मंत्रालयों-विभागों, राज्य खाद्य और दवा प्रशासन से कई कई बार लिखित में शिकायत की जा चुकी है. उन्होंने आगे कहा कि खुदरा विक्रेताओं के लिए मार्जिन 16 और थोक विक्रेताओं के लिए 10 फीसदी तक सीमित है. वहीं, ऑनलाइन कंपनियां ग्राहकों को 50 से 70 फीसदी तक की भारी छूट दे रही हैं.