उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मौत के मामले की सीबीआई से जांच करा सकती है. इस बाबत जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्रालय से सिफारिश की जा सकती है.

डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय को 2017 में अंबेडकर नगर के भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता राकेश गुप्ता ने एक पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने भाजपा की पूर्ववर्ती पार्टी जनसंघ के संस्थापकों में शुमार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मौत के पीछे बड़ी साज़िश की आशंका जताई थी. साथ ही इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी. बताया जाता है कि इस संबंध में अब गृह मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से रिपोर्ट मांगी है.

बताया जाता है कि इलाहाबाद के रेल पुलिस अधीक्षक से मामले की शुरूआती पड़ताल करने को कहा गया था. उन्होंने रेल पुलिस महानिरीक्षक को अपनी रिपोर्ट सौंपी है. यह रिपोर्ट अब राज्य सरकार को भेजी जा रही है. इसमें कहा गया है कि मामले से जुड़े लगभग सभी दस्तावेज़ गायब हैं. इनमें केस डायरी और प्राथमिकी भी शामिल है. सिर्फ संबंधित पुलिस थाने के रजिस्टर से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक तीन लोगों को ग़िरफ़्तार किया गया था. इनमें एक को चार साल की सजा हुई थी.

बताया जाता है कि शुरूआती पड़ताल में इस तरह के संदिग्ध निष्कर्ष सामने आने के बाद राज्य सरकार इसकी जांच सीबीआई काे सौंपने का मन बना चुकी है. इस बाबत कभी भी केंद्रीय गृह मंत्रालय से सिफारिश की जा सकती है. ग़ौरतलब है कि दीनदयाल उपाध्याय का शव 11 फरवरी 1968 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय स्टेशन (अब दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन) के पास रेल पटरियों पर लावारिस पाया गया था. तब से आज तक उनकी मौत के कारणों का ठीक-ठीक ख़ुलासा नहीं हो सका है.