दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में बदलाव का एक और संकेत सामने आया है. ख़बरों के मुताबिक इस बार भी हर साल की तरह जेएनयू प्रशासन ‘नेहरू स्मृति व्याख्यान’ का आयोजन कर रहा है. लेकिन देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जयंती पर नहीं बल्कि जनसंघ के संस्थापकों में एक रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मदिवस पर 25 सितंबर को.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जेएनयू में ‘नेहरू स्मृति व्याख्यान’ आयोजन इससे पहले तक 14 नवंबर (नेहरू जयंती) या उसके आस-पास की किसी तारीख़ पर ही होता रहा है. लेकिन इस बार यह सिलसिला बदला गया है. इस बार व्याख्यान का शीर्षक भी अन्य मौकाें से अलहदा ‘युवा और सत्य’ (यूथ एंड ट्रुथ) है और इसमें हिस्सा लेने वाले अतिथि भी. मसलन- इस बार बेंगलुरू से ताल्लुक़ रखने वाले आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) इस आयोजन में व्याख्यान देने आ रहे हैं.

इस बदलाव के ख़िलाफ़ यूनिवर्सिटी के भीतर से कुछ आवाज़ें उठना भी शुरू हो गई हैं. जेएनयू शिक्षक संघ की अध्यक्ष शोनाझारिया मिंज़ कहती हैं, ‘अभी तक मेरे पास अधिकृत रूप से यह जानकारी नहीं है कि इस व्याख्यान की तिथि दो महीने पहले कर दी गई. मुझे यह भी नहीं बताया गया है कि इसमें व्याख्यान देने के लिए कौन आ रहा है. फिर भी अगर यह जानकारी सही तो इससे मैं हतप्रभ हूं. क्योंकि इस व्याख्यान के लिए हमेशा किसी समृद्ध अकादमिक पृष्ठभूमि वाली शख्स़ियत को बुलाया जाता रहा है. लेकिन इस बार अगर आध्यात्मिक गुरु व्याख्यान देने आ रहे हैं ताे यह धक्का पहुंचाने वाली ख़बर है.’

एक अन्य प्रोफेसर नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, ‘हालांकि पिछली बार भी श्रीश्री रविशंकर को व्याख्यान देने के लिए बुलाया गया था. लेकिन तब कम से कम व्याख्यान का आयाेजन तो 13 नवंबर को हुआ था. इस बार तो वह परंपरा भी तोड़ दी गई. इसके पीछे निश्चित तौर पर कोई ‘इरादा’ नज़र आता है. मुझे तो लगता है कि कुछ समय बाद कहीं ‘नेहरू स्मृति व्याख्यान’ का नाम ही न बदल दिया जाए. इन परिस्थितियों में आप इस संभावना को ख़ारिज़ नहीं कर सकते.’