सोशल मीडिया और इंटरनेट के इस दौर में न्यूज़ पोर्टल और वेबसाइटों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है. छोटे-बड़े अख़बारों और न्यूज़ चैनलों को इनसे कड़ी टक्कर मिल रही है. इस माध्यम ने मीडिया में रोजगार का एक नया रास्ता खोला है. कई दिग्गज पत्रकार भी प्रिंट और टेलीविज़न छोड़ कर वेबसाइटों के लिए काम कर रहे हैं. मोबाइल जर्नलिज़्म को बढ़ावा देने में इस माध्यम की भूमिका सबसे अहम है.

ऐसे में अगर कोई सरकार या उसमें बैठा कोई व्यक्ति दावा करे कि वेब पत्रकारिता कोई पत्रकारिता ही नहीं है तो यह इस पेशे के लोगों के लिए अस्वीकार्य होगा. हालांकि यह बात इन दिनों इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कही जा रही है. एक वायरल पोस्ट के मुताबिक़ एक राज्य की सरकार ने न्यूज़ पोर्टलों-वेबसाइटों में काम करने वाले संपादकों और रिपोर्टरों को पत्रकार मानने से इनकार कर दिया है. देखने में यह पोस्ट किसी अख़बार में छपी ख़बर लगती है.

वायरल ख़बर
वायरल ख़बर

इस ख़बर की हेडिंग है - सरकार पोर्टल और वेबसाइट के लोगों को नहीं मानती पत्रकार. इसके बाद मेन कंटेंट में लिखा है - पोर्टल और वेबसाइट बना कर पत्रकारिता की धौंस जमाने वालों के लिए शासन ने सख़्ती कर दी है... अधिकारियों के साथ-साथ विभागाध्यक्षों को भी निर्देश दिया है कि न्यूज़ पोर्टलों की कोई मान्यता नहीं है. किसी भी न्यूज़ पोर्टल के संपादक या रिपोर्टर को पत्रकार न माना जाए. इन्हें सरकारी आयोजनों के लिए सरकार की तरफ़ से पास न दिए जाएं और न ही इन्हें प्रेस रिलीज़ भेजी जाएं. विज्ञापन आदि पर भी रोक लगाई है. इसके अलावा इस ख़बर की दो सब-हेडिंग में से एक में अवनीश अवस्थी नाम के एक अधिकारी का ज़िक्र है. इसमें उनके हवाले से लिखा गया है कि वेब पत्रकारों को किसी प्रकार की सुविधा न दी जाए.

यह ख़बर किस अख़बार की है यह हमें पता नहीं चल सका. गूगल सर्च करने पर यह पुष्टि नहीं होती कि इस ख़बर में दी गई जानकारी सही है. हालांकि कुछ वेबसाइटों पर यह ख़बर पढ़ी जा सकती है. लेकिन ये वेबसाइटें विश्वसनीय नहीं हैं. ख़बर में भले ही चित्रकूटधाम मंडल के सूचना अधिकारी भूपेंद्र सिंह यादव के हवाले से इस ख़बर की पुष्टि की गई है. लेकिन ट्विटर पर सर्च करने के दौरान हमें उत्तर प्रदेश के सूचना सचिव अवनीश अवस्थी का एक ट्वीट मिला जो उन्होंने एक ट्विटर यूज़र को बतौर जवाब लिखा था.

दरअसल उत्तर प्रदेश के तमाम स्थानीय मीडिया में यह मैसेज शेयर किया गया था. इसके बाद Uttarpradesh.org नाम की एक वेबसाइट के संस्थापक अनिल तिवारी ने 15 सितंबर को ट्विटर पर अवनीश अवस्थी को टैग करते हुए कहा था कि उनके नाम से वॉट्सएप पर एक फ़र्ज़ी ख़बर वायरल हो रही है. इस पर अवस्थी ने कॉमेंट करते हुए लिखा था कि यह ख़बर पूरी तरह से झूठी है. बाद में अनिल तिवारी की वेबसाइट ने इस पर एक आर्टिकल भी प्रकाशित किया जिसमें अवस्थी के हवाले से मैसेज को झूठा करार दिया गया था.

इस ख़बर पर यक़ीन न करने की एक वजह अवनीश अवस्थी का पूर्व में वेब मीडिया के काम को पत्रकारिता मानना और उसकी सराहना करना भी है. योगी सरकार के कामकाज के प्रचार के लिए वे पोर्टलों और वेबसाइटों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात करते रहे हैं. फिर इन दिनों न्यूज़ वेबसाइटों का इतना प्रभाव है कि वे अपनी ख़बरों व रिपोर्टों के ज़रिए सरकारों को ज़रूरी क़दम उठाने के लिए विवश कर रही हैं. ऐसे में अगर सरकार उन्हें और उनकी पत्रकारिता को अमान्य करार देती तो यह अपने-आप में बड़ी ख़बर होती जिसे तमाम बड़ी वेबसाइटें प्राथमिकता के साथ प्रकाशित करतीं. सत्याग्रह ने भी इस बारे में उनसे वॉट्सएप के ज़रिए पूछा था. जवाब में उन्होंने इसे झूठी ख़बर बताया है.