बीते कुछ समय से लगातार बीमार चल रहे फ्रांसिस डिसूजा और पांडुरंग मडकईकर को गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने अपने मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया है. यह फैसला सोमवार को किया गया. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस फैसले पर हैरानगी जताते हुए फ्रांसिस डिसूजा ने सवालिया लहजे में कहा, ‘क्या यह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रति मेरी 20 साल की निष्ठा और वफादारी का इनाम है?’

गोवा का शहरी विकास विभाग देखने वाले फ्रांसिस डिसूजा बीते कुछ समय से बीमार रहने के बाद मौजूदा समय में अमेरिका के एक अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा, ‘रविवार की शाम मनोहर पर्रिकर के साथ फोन पर मेरी बातचीत हुई थी. उस दौरान कैबिनेट में किसी तरह के बदलाव के बारे में उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा. आज इस बारे में जानकारी मिलने के बाद जब मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने इसे पार्टी हाईकमान का फैसला बताया.’

इस फैसले से नाराज फ्रांसिस डिसूजा ने आगे कहा, ‘बीते एक साल से मुझे कैबिनेट से बाहर किए जाने की कोशिशें की जा रही थीं और आखिरकार इसमें कामयाबी मिल गई. मुझे लगता है कि अगर कल मैं पार्टी के लिए अनुपयोगी हो जाऊंगा तो मुझे भाजपा से भी बाहर कर दिया जाएगा.’

उधर, गोवा कैबिनेट से ऊर्जा मंत्री पांडुरंग मडकईकर को भी बाहर किया गया है. इसी साल जून में ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्काघात) का सामना करने के बाद इन दिनों वे मुंबई के एक निजी अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं. इन दोनों मंत्रियों की जगह पर भाजपा के ही मिलिंद नाइक और नीलेश काबराल को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. खबरों के मुताबिक गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा सोमवार की शाम दोनों नेताओं को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी.

दिलचस्प बात यह है कि गोवा सरकार के दो मंत्रियों को बीमारी के नाम पर ऐसे समय में कैबिनेट से हटाया गया है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद पेनक्रियाज (अग्नशाय) संबंधी बीमारी का इलाज कराने के लिए दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती हैं. मनोहर पर्रिकर की बीमारी को देखते हुए बीते दिनों गोवा में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें भी चर्चा में थीं. इसके बाद रविवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए कैबिनेट में कुछ फेर-बदल की तरफ इशारा जरूर किया था.