पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत से जुड़े गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करने का निर्णय केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर छोड़ दिया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक एक आरटीआई आवेदन के संदर्भ में सीआईसी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के केंद्रीय सूचना अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत से जुड़े सभी दस्तावेज प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सामने रखें ताकि वे इन्हें सार्वजनिक करने के संबंध में कोई निर्णय लें. इस आवेदन में पूछा गया गया है कि 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में तत्कालीन प्रधानमंत्री के शव का मेडिकल परीक्षण किया गया था या नहीं.

सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने अखबार को बताया कि इस तरह के संदेहों, गंभीर सवालों, मौत और रिकॉर्ड के गायब हो जाने से जुड़े सभी तथाकथित गोपनीय दस्तावेजों को आयोग ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के सामने रखने का फैसला किया है जो यह जानकारी हासिल करने के लोगों के मौलिक अधिकार पर विचार करेंगे. उनके मुताबिक यदि यह बात भी सामने आती है कि शास्त्री जी की मौत हॉर्ट अटैक से हुई है, तो भी लोगों के सारे संदेह दूर हो जाएंगे. उन्होंने हैरानी जताई कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत की जांच के लिए बनाई गई राजनारायण समिति से जुड़ा कोई रिकार्ड राज्यसभा के पास नहीं है.