वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत और बढ़ने की आशंका के बीच भारत अब इसका आयात घटाने और संग्रहित किए गए कच्चे तेल का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत पिछले चार साल के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है और अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है. ऐसे में भारत की रिफाइनरी कंपनियां अपने सुरक्षित भंडारों का तेल इस्तेमाल करने पर विचार कर रही हैं. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के अध्यक्ष संजीव सिंह इस बात की पुष्टि करते हुए इस रिपोर्ट में कहते हैं, ‘बाकी उपायों के अलावा हम तेल के आयात को कम करने के लिए भंडारण पर निर्भरता बढ़ाने की तरफ काम रहे हैं.’

हालांकि कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम भले ही अभी बेहतर लग रहा हो लेकिन इसके अपने जोखिम भी हैं. इनका कहना है कि यदि भविष्य में भी विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम नीचे नहीं आए तो कंपनियों को आज के मुकाबले और अधिक दामों पर कच्चा तेल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और तब आर्थिक मोर्चे पर कंपनियों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है.

भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है और अपनी जरूरत का 81 फीसदी हिस्सा आयात से पूरा करता है.