‘आधार’ संवैधानिक रूप से सही है या गलत, इस मसले पर कल सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकता है. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार आधार की अनिवार्यता मामले में दायर 27 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में सुनवाई शुरू की थी. इस मामले में अदालत ने 38 बार सुनवाई की है. इस मैराथन सुनवाई के बाद 10 मई को अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण की पांच सदस्यीय पीठ कर रही थी.

अदालत बुधवार को इस बात का भी फैसला कर सकती है कि आधार निजता के अधिकार का हनन करता है या नहीं. इस बाबत अदालत ने केंद्र सरकार से अपनी दलीलें पेश करने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया था. इसके बाद से निजता के अधिकार और आधार को लेकर भी एक बहस शुरू हो गई थी. याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में ‘आधार’ को निजता के मौलिक अधिकार में हस्तक्षेप बताते रहे हैं. वहीं सरकार का कहना है कि आधार कार्ड से किसी की निजता को कोई खतरा नहीं है.