वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से धोखाधड़ी और जानबूझकर लोन नहीं चूकाने वालों पर प्रभावी कार्रवाई करने को कहा है. इसके साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि अर्थव्यवस्था को औपचारिक रूप देने से भारत की विकास दर में तेजी आएगी और आठ फीसदी के आसपास विकास दर हासिल करने में मदद मिलेगी. अरुण जेटली ने सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ हुई वार्षिक समीक्षा बैठक में ये बातें कही हैं. वित्त मंत्रालय ने एक ट्वीट कर बताया कि इस बैठक में बैंकों के कर्ज देने की क्षमता और बैंकिंग सुधार से संबंधित मामलों पर चर्चा की गई है.

वित्त मंत्रालय की ओर जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस बैठक में अरुण जेटली ने अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक आवश्यक पूर्व शर्त के रूप में बैंकिंग प्रणाली पर भरोसा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. वित्त मंत्री ने बैठक में बैंकों को अर्थव्यवस्था की लाइफ लाइन बताते हुए कहा कि बैंकों को उभरती अर्थव्यवस्था की जरूरत के अनुसार लोन देने की अपनी क्षमता को बढ़ाने की जरूरत है.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक वित्त मंत्री ने बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड लागू होने का असर साफ दिखाई दे रहा है. इसके चलते बैंकों का कर्ज न चुकाने वालों में डर पैदा हुआ है और डिफॉल्ट में कमी आई है. इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वित्त वर्ष में 1.80 लाख करोड़ रुपये के कर्ज की रिकवरी की जा सकती है.

इस दौरान अरुण जेटली का यह भी कहना था कि बहुत ज्यादा कर्ज देने और फंसे हुए कर्ज (एनपीए) में विशाल बढ़ोतरी के चलते बैंकों की हालत खराब है. उन्होंने इसके लिए पिछली यूपीए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वह एनपीए के मुद्दे पर आंखें मूंदे हुए थी.