रफाल विमान सौदे को लेकर चल रहे विवाद के बीच फ्रांस के मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने सफाई दी है. मैक्रों ने कहा है कि इस सौदे को लेकर भारत और फ्रांस की सरकार के बीच बातचीत हुई थी और जिस समय सौदे पर हस्ताक्षर हुए उस समय वे फ्रांस के राष्ट्रपति नहीं थे.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में शिरकत करने के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मैक्रों से पूछा गया कि क्या सौदे में रिलायंस को साझेदार बनाने के लिए भारत सरकार की तरफ से कोई दबाव बनाया गया था. इस पर मैंक्रो ने कहा, ‘मैं साफ बात करूंगा. यह सौदा सरकारों के बीच हुआ था. मैं (इस मामले में) प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी की बात का उल्लेख करूंगा जो उन्होंने कुछ दिन पहले कही थी. मुझे और कुछ नहीं कहना. मैं उस समय सरकार में नहीं था और हमारे यहां के नियम बिलकुल स्पष्ट हैं.’ हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक मैक्रों ने इस बात पर जोर दिया कि रफाल सौदा एक औद्योगिक समझौते के साथ भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक गठबंधन भी है. उन्होंने कहा कि सैन्य व रक्षा संबंधों के लिहाज से इस सौदे का काफी ज्यादा महत्व है.

बता दें कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का एक बयान सामने आने के बाद से रफाल मामला भारत सरकार के साथ फ्रांस की सरकार के लिए भी सिरदर्द बन गया है. बयान में ओलांद ने दावा किया था रफाल सौदे में भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की जगह अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को शामिल किए जाने का दबाव भारत सरकार की तरफ से बनाया गया था. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के पास कोई विकल्प नहीं था. उधर, भारत सरकार ने कहा है कि वह ओलांद के बयान की जांच कर रही है. वहीं, ओलांद ने अपने बयान पर कायम रहने की बात कही है. इस बीच विपक्ष का मोदी सरकार पर हमला जारी है.