सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आधार को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है. आधार की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने यह फैसला सुनाया. खबरों के मुताबिक अदालत ने कहा कि आधार हाशिये पर पड़े लोगों को ताकत और पहचान देता है. उसका यह भी कहना था कि इसके फायदे नुकसान की तुलना में ज्यादा हैं. पांच जजों की बेंच में जस्टिस सीकरी ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और जस्टिस खानविलकर की तरफ से फैसला सुनाया और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अलग फैसला सुनाया. बहुमत के हिसाब से जस्टिस एके सीकरी द्वारा सुनाया गया फैसला लागू होगा.

इनके लिए जरूरी होगा आधार

· पैन कार्ड बनाने के लिए

· आयकर रिटर्न के लिए

· सरकार की लाभकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ लेने के लिए


इनके लिए आधार की जरूरत नहीं होगी

· नए मोबाइल सिम के लिए आधार की जरूरत नहीं होगी. वहीं पेटीएम और दूसरे पेमेंट बैंकों के लिए भी आधार जरूरी नहीं होगा.

· आधार से मोबाइल नंबर लिंक कराना भी अनिवार्य नहीं होगा.

· बैंक में खाता खोलने के लिए आधार की जरूरत नहीं होगी.

· बच्चों से एडमिशन के समय स्कूल आधार नहीं मांग सकते.

· सीबीएसई, नीट, यूजीसी और बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए भी आधार की जरूरत नहीं होगी.

· 14 साल से छोटे बच्चों के पास आधार नहीं होने पर उन्हें केंद्र और राज्य सरकारों की सेवाओं से दूर नहीं रखा जा सकता.

आधार अधिनियम को मनी बिल के रूप में लोकसभा से पारित कराने पर जस्टिस एके सीकरी ने कहा कि आधार को मनी बिल के तौर पर पास कराया जा सकता है. वहीं इस पर अलग राय रखते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आधार को मनी बिल के तौर पर पास नहीं कराया जा सकता. मनी बिल के दायरे में नहीं आने वाले किसी बिल को अगर मनी बिल के तौर पर पास कराया जाता है तो यह संविधान के साथ धोखाधड़ी है.

इस पूरे मामले में अलग राय रखने वाले जस्टिस चंद्रचूड़ ने आधार को पूरी तरह से असंवैधानिक बताते हुए कहा कि आधार प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के अधिकारों का उल्लंघन करता है. उनका कहना था कि आधार का कोई स्वतंत्र नियंत्रक ढांचा न होने की वजह से डेटा की सुरक्षा से समझौता हो रहा है. उनके मुताबिक आधार संविधान के अनुच्छेद 14 पर पूरी तरह से खरा नहीं उतररता जो सभी को बराबरी का अधिकार देता है.

इस मामले में 10 मई को सुनवाई पूरी हो गई थी. सभी पक्षों को सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि आधार निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है. उधर, सरकार का तर्क था कि आधार समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करता है और इससे कल्याणकारी योजनाओं का फायदा उन तक बिना बिचौलियों के पहुंचता है. उसने आधार से जुड़े डेटा के पूरी तरह से सुरक्षित होने का भी दावा किया था.