अयोध्या विवाद से जुड़े एक मामले में गुरुवार को आए फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा है, ‘अयोध्या मुसलमानों का नहीं बल्कि हिंदुओं का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है. मुसलमानों का पवित्र धार्मिक स्थान मक्का है.’ एनडीटीवी के मुताबिक उमा भारती ने यह बात राम मंदिर-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद से जुड़े मामले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कही है.

उमा भारती का यह भी कहना है, ‘यह धार्मिक विवाद का मामला नहीं है. अयोध्या भगवान राम की जन्मस्थली है इसलिए यह हिंदुओं के लिए एक महत्वूपर्ण धार्मिक स्थल है. मुसलमानों के लिए अयोध्या कोई धार्मिक स्थान नहीं है. राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को जानबूझकर खड़ा किया गया और यह विवाद एक भूमि विवाद में बदल गया.’

उधर, सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिए गए आज के फैसले पर अन्य धार्मिक संगठनों और राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी आई हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है, ‘देश का एक बड़ा वर्ग यही चाहता है कि अयोध्या विवाद का जल्द से जल्द समाधान हो और हमारी भी यही आकांक्षा है कि इस मामले पर जल्दी से जल्दी कोई फैसला आए.’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार कहते हैं, ‘सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर से इस मामले पर सुनवाई का निर्णय किया है. इस फैसले का संघ स्वागत करता है और हमें विश्वास है कि इस मुकदमे में जल्दी ही निर्णय भी सुनाया जाएगा.’

विश्व हिंदू परिषद् (विहिप) के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है, ‘देश की सर्वोच्च अदालत के गुरुवार के फैसले के बाद राम जन्मभूमि की याचिकाओं की सुनवाई के लिए रास्ता साफ हो गया है.’ वहीं भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के मुताबिक, ‘शीर्ष अदालत के आज के फैसले ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में अंतिम फैसले के लिए रास्ता साफ कर दिया है.’ स्वामी का यह भी कहना है, ‘इस्लाम में मस्जिद को स्थानांतरित करने की व्यवस्था है लेकिन हिंदुओं में मंदिर को किसी दूसरी जगह नहीं ले जाया जा सकता.’

इस दौरान आॅल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है. उन्होंने कहा है, ‘अगर यह मामला संवैधानिक पीठ को भेजा जाता तो ज्यादा बेहतर होता. मेरा ऐसा विचार है कि धर्मनिरपेक्षता के विरोधी इस फैसले का इस्तेमाल अपनी वैचारिक जीत के तौर पर करेंगे.’ वहीं बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी का कहना है, ‘सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम समाज के लिए झटके के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. इस फैसले का मतलब यह है कि अब कोर्ट में ट्रायल शुरू होगा.’

उधर, आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सकारात्मक बताया है लेकिन साथ ही कहा है, ‘मस्जिदें नमाज का अभिन्न अंग हैं. मस्जिदें इसीलिए बनाई जाती हैं ताकि लोग वहां जाकर नमाज पढ़ सकें.’