साल 2007 में रिलीज हुई संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘सांवरिया’ देखना किसी आर्ट गैलरी में घुसने का भ्रम देता है. चार रातों की यह छोटी सी प्रेम कहानी परदे पर गुलाबो जी नाम के किरदार की जुबानी बताई गई है जिसे रानी मुखर्जी निभाती हैं. इसके पहले दृश्य में भी वे ही नजर आती हैं, मगर शुक्रिया उनका कि फिर नायक से मिलवाने में बमुश्किल एक मिनट का ही वक्त लेती हैं. असल में शुक्रिया, निर्देशक भंसाली का! क्योंकि फिर जो परदे पर आता है, वह रणबीर कपूर है जिसे देखकर जाने कितनी लड़कियां खुशी से सही मायनों में गुलाबी हो गई होंगी.

फिल्म का टाइटल सॉन्ग ‘ले जाएगा एक रोज तेरा उड़ा के जिया, सांवरिया...’ रणबीर कपूर का एंट्री सॉन्ग भी है. इसमें वे कई मन मासूमियत और कई टन फुर्ती के साथ गुडलुक्स की गंगा बहाते हैं और अपने डॉन्स से एक पल को भी नजर चूकने को कुफ्र बराबर बनाते हैं. उनकी बेशकीमती और मासूम मुस्कुराहट के बाद सैकड़ों नहीं, हजारों नहीं, लाखों ने दिल थामकर कहा होगा - अपना ड्रीमबॉय चुनने के लिए इसे पैमाना रखूंगी. कई साल गुजरने के बाद ‘सांवरिया’ दोबारा देखो तो पता चलता है कि आखिर क्यों लड़कियां रणबीर कपूर को अपना जीमेल-फेसबुक पासवर्ड बनाकर रखती थीं!

रणबीर कपूर का किरदार जब हाथ उठाकर अपने दादा वाले अंदाज में आंखें चमकाकर कहता है, ‘मैं रणबीर राज हूं और आप मुझे राज बुला सकते हैं’ तो यह किसी किरदार से कहा संवाद नहीं बल्कि ऑडियंस को दिया गया परिचय लगता है. मानों इन शब्दों के पीछे छिपकर वे कह रहे हों कि ‘दादा राज कपूर’ से लेकर ‘बादशाह राज’ तक की कमी पूरी करने के लिए मैं आ गया हूं. उनका यह अनकहा बाद के सालों में काफी हद तक सच भी साबित होता हुआ लगता है.

हालांकि राज कपूर से जुड़े कई प्रतीकों को निर्देशक भंसाली ने ‘सांवरिया’ में इस्तेमाल किया था और ऐसा करके वे न सिर्फ राज कपूर को सम्मान दे रहे थे बल्कि उनके पोते का परिचय भी भली तरह से करवा रहे थे. इसके अलावा इस फिल्म में रणबीर अपने पिता ऋषि कपूर के बेहद मशहूर संवाद ‘क्या तुमने किसी से प्यार किया?’ बोलते भी नजर आते हैं. यह कहने की जरूरत नहीं है कि ‘सांवरिया’ के अलावा उन्हें कभी किसी और फिल्म में अपना परिचय देने के लिए ऐसा कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ी.

सांवरिया में यायावर, शायर और संगीत प्रेमी बने रणबीर राज जिस शायराना अंदाज में अपनी लाइनें बोलते हैं, आपको यकीन होता है कि यह उन्हीं का कलाम है. यहां पर उनको आप न सिर्फ हीरोइन सोनम कपूर से बल्कि ज़ोहरा सहगल से भी उतनी ही शिद्दत से रोमांस करते देखते हैं. ज़ोहरा सहगल उस समय 25 साल के रहे रणबीर कपूर की लगभग चार गुनी उम्र और चालीस गुना अनुभव वाली अभिनेत्री रही होंगी. लेकिन यहां पर भी वे अपना जादू बरकरार रखने में पूरी तरह सफल होते हैं. और इतना सफल होते हैं कि फिल्म में सलमान खान जैसा सितारा कब आकर चला जाता है, आपको पता भी नहीं चलता.

यहां पर फिल्म के एक दृश्य की बात जरूर की जानी चाहिए जिसके बारे में बताया जाता है कि इसके लिए रणबीर कपूर ने 100 से ज्यादा रीटेक किए थे. यह ‘जब से तेरे नैना..’ गाने का वह तौलिया ढलकने वाला सीन है जो न सिर्फ तब बेहद चर्चित हुआ था बल्कि आज भी याद किया जाता है. अपना सींकिया मगर सेक्सी बदन दिखाने की हिम्मत रणबीर कपूर ने पहली ही फिल्म में की थी. इसे अब देखो तो पता चलता है कि आज उनका शरीर इससे कई गुना सुंदर है, लेकिन सुंदरियों के सपनों में आने वाली जो छाप यह दृश्य छोड़ता है, उसे अब खुद रणबीर हजार टेक लेकर भी क्रिएट नहीं कर सकते.

फिल्म में उनके गुडलुक्स की तरह ही उनका अभिनय भी खोटहीन नजर आता है. पहली फिल्म उनके चार्म की जो झलक दिखाती है, वह बाद में ‘बचना ऐ हसीनों’ ‘ये जवानी है दीवानी’ ‘अनजाना-अनजानी’ जैसी तमाम फिल्मों में नजर आती है. उनकी मासूमियत का भरपूर इस्तेमाल जहां ‘बर्फी’ और ‘जग्गा जासूस’ कर पाती हैं, वहीं टूटे दिल वाले प्रेमी की उलझन को वो जो अभिव्यक्ति देते हैं, वह लाजवाब तरीके से ‘तमाशा’ और ‘रॉकस्टार’ में देखने को मिल चुकी है. कुल मिलाकर रणबीर अपनी पहली ही फिल्म से इस बात का इशारा दे देते हैं कि ऐसा कुछ नहीं, जो वे नहीं कर सकते. शायद इसीलिए तब सबसे बड़े फिल्म क्रिटिक्स ने ‘सांवरिया’ को नकारने के बावजूद रणबीर के बारे में बार-बार यही लिखा था कि उनमें बड़ा, बहुत बड़ा स्टार बनने की हर काबिलियत है.