भारत और संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को गरीबी एवं शहरीकरण, स्वास्थ्य, जल एवं स्वच्छता तथा पर्यावरण बदलाव पर काम करने के लिए पांच साल की ‘टिकाऊ विकास रूपरेखा’ (सस्टेनेबल डेवलपमेंट फ्रेमवर्क) पर हस्ताक्षर किए हैं. पीटीआई के मुताबिक इस मौके पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि आयोग राज्यों के बीच बेहतर प्रशासन संचालन के मामले में प्रतिस्पर्धा चाहता है. उन्होंने कहा कि देश को जनसांख्यिकीय विविधता का लाभ मिलना शुरू हो चुका है. उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में बाजार अर्थव्यवस्था पर आधारित ऐसी कोई आधुनिक सभ्यता नहीं होगी जहां हम समाज में सबसे हाशिये पर रह रहे लोगों का ध्यान नहीं रख सकते.’

इस दौरान यहां मौजूद संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के स्थानीय प्रतिनिधि (भारत) यूरी अफनासिएव ने कहा कि आने वाले दशकों में भारत की विकास दर 7-9 प्रतिशत रहेगी. यूरी अफनासिएव ने कहा, ‘हमने ये देखा है कि झारखंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे पिछड़े राज्यों में गरीबी दूर करने की दर देश के राष्ट्रीय औसत से बेहतर है.’

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने कहा कि भारत अभी 7.5 प्रतिशत की दर से आर्थिक वृद्धि कर रहा है और देश की महत्वाकांक्षा अगले तीन दशक के दौरान इससे भी बेहतर दर से वृद्धि करना है. अमिताभ कांत ने इस दौरान यह भी बताया कि भारत पिछले साल के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल रहा है.