शिव सेना सांसद संजय राउत ने रफाल विमान सौदे को ‘बोफोर्स तोप घोटाले का बाप’ बताया है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शिव सेना के मुखपत्र ‘सामना’ में संजय राउत ने लिखा है कि बोफोर्स तोप सौदे को लेकर कांग्रेसी नेताओं पर 65 करोड़ रुपये की घूस लेने का आरोप लगाने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आज सत्ता में है और अब खुद उस पर 700 करोड़ की कथित घूस लेने का आरोप है.

संजय राउत आगे लिखते हैं, ‘सवाल यह नहीं कि लड़ाकू विमान के इस सौदे में अनिल अंबानी के साथ अनुबंध किया गया. मुद्दा यह है कि संयुक्त प्र​गतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल में जिस विमान की खरीद 527 करोड़ रुपये में तय की गई उसे नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में संशोधित करके 1570 करोड़ रुपये कर दिया गया.’ उनके मुताबिक इसका मतलब यह है कि बिचौलिये को इस सौदे से करीब एक हजार करोड़ रुपये का दलाली के तौर पर फायदा हुआ है.

बीते दिनों फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने दावा किया था कि इस सौदे में भारतीय सहयोगी के तौर पर खुद भारत सरकार ने अनिल अंबानी का नाम आगे किया था. भाजपा पर निशाना साधते हुए संजय राउत ने यह भी कहा कि उस दावे पर फ्रांस्वा ओलांद को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का समर्थक कहा जाए या फिर इसे ‘राष्ट्र विरोधी’ कहा जाएगा. राउत के मुताबिक रफाल विमान सौदे की कथित अनियमितताओं पर लगातार हमलावर रुख बनाए रखने की वजह से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को देश की राजनीति में ज्यादा अहमियत मिल रही है.

इसके साथ ही संजय राउत ने उन अरोपों को भी हास्यास्पद करार दिया है जिनमें भाजपा ने कहा था कि रफाल सौदे के वित्तीय लेन-देन को सार्वजनिक करने से भारत के दुश्मन देशों को फायदा पहुंचेगा. शिव सेना के नेता के मुताबिक अगर ऐसी ही बात है तो 1980 के दशक में भाजपा ने बोफोर्स तोप सौदे के वित्तीय लेन-देन को सार्वजनिक करने की मांग क्यों की थी. रफाल सौदे को एक बड़ा घोटाला बताते हुए उनका यह भी कहना है कि यह मुद्दा इतनी जल्दी और आसानी से शांत होने वाला नहीं है.