बीते हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की जमकर तारीफ की. ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के पक्ष में समर्थन जुटाने यूएन पहुंचे ट्रंप ने अपने संबोधन में सभी देशों से ईरान के खिलाफ खड़े होने की अपील की. ट्रंप द्वारा भारत की एकाएक तारीफ़ करने को भी ईरान के संदर्भ में ही देखा जा रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर तमाम देशों का अब तक जो रुख देखने को मिला है, उसके चलते इन प्रतिबंधों की सफलता काफी हद तक भारत पर निर्भर हो गई है.

प्रतिबंधों की सफलता के लिए भारत अहम क्यों?

ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध चार नवंबर से लागू होंगे. अमेरिका चाहता है कि इसके बाद ईरान से कोई भी देश तेल न खरीदे. अगर ईरान से तेल खरीदने वाले देशों की बात करें तो इनमें चीन पहले नंबर पर आता है. वह ईरान से निर्यात होने वाले कुल तेल का 35 फीसदी हिस्सा खरीदता है. चीन के बाद ईरानी तेल के खरीददारों में भारत का नंबर आता है जो ईरान का करीब 27 फीसदी तेल खरीदता है. इसके बाद दक्षिण कोरिया, तुर्की, इटली और जापान का नाम आता है. इटली के अलावा यूरोपीय देशों में स्पेन, फ्रांस और ग्रीस भी ईरान के दस सबसे बड़े खरीददारों में शामिल हैं.

अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर इन सभी देशों के रुख की बात की जाए तो चीन अमेरिका से कह चुका है कि वह ईरान पर प्रतिबंध लागू होने के बाद भी उससे तेल का आयात पूरी तरह बंद नहीं करेगा. अधिकांश यूरोपीय देशों ने भी ईरान में अपने बड़े निवेश को वजह बताकर तेल का आयात पूरी तरह न बंद करने की बात कही है. हालांकि, अमेरिका की तरफ से इन्हें मनाने की कोशिशें जारी हैं. इसके अलावा ईरानी तेल के एक और बड़े खरीददार तुर्की के इस समय अमेरिका से जैसे संबंध हैं, उन्हें देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि वह अपने करीबी मित्र ईरान को मायूस करेगा.

कुल मिलाकर देखें तो ईरान से तेल के बड़े खरीददारों में से केवल दक्षिण कोरिया और जापान ही अमेरिकी प्रतिबंधों को मानने के लिए तैयार हुए हैं. यही वजह है कि ईरान पर लगने वाले प्रतिबंधों की सफलता के लिए भारत काफी अहम हो गया है. ट्रंप प्रशासन का भी मनाना है कि भारत ईरान से इतना ज्यादा तेल खरीदता है कि अगर वह ईरानी तेल के आयात को शून्य कर दे तो इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर बड़ा फर्क पड़ेगा और अमेरिकी प्रतिबंध का मकसद काफी हद तक पूरा हो जाएगा.

भारत की मुश्किल

अमेरिका अपने प्रतिबंधों की सफलता के लिए लगातार भारत पर दबाव बना रहा है. लेकिन, इस मसले से जुड़ी भारत की अपनी मुश्किलें हैं. इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही है. इस साल डॉलर के मुकाबले रुपये में 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है. देश में तेल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं.

जानकारों की मानें तो ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध लगते ही दुनियाभर में तेल की कीमतों में भारी उछाल आएगा. एक सर्वेक्षण के मुताबिक ईरान पर प्रतिबंध लगने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच जायेगी. अर्थजगत के विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति सुस्त भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वैसे भी किसी झटके से कम नहीं होगी और अगर ऐसे में भारत ने अमेरिका के कहे मुताबिक ईरान से तेल आयात बिलकुल बंद दिया तो उसे इसकी दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है.

कुछ जानकार यह भी बताते हैं कि भारत की आंतरिक राजनीतिक परिस्थितयों के चलते ईरान से तेल का आयात बंद होने के और भी बुरे परिणाम सामने आ सकते हैं. इनके मुताबिक जब अमेरिकी प्रतिबंध लागू होंगे तब भारत में चार राज्यों के चुनाव होने वाले होंगे. साथ ही इसके छह महीने बाद ही आम चुनाव भी होगा. ऐसे में तेल की बढ़ी कीमतों के कारण जनता की नाराजगी से बचने के लिए मोदी सरकार के पास एक ही तरीका होगा कि वह तेल पर लगने वाले तमाम टैक्स में कटौती कर इसका बोझ अपने ऊपर झेले. अगर सरकार ऐसा करती है तो राजकोषीय घाटे में जबरदस्त बढ़ोत्तरी होगी और भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ेगा.

एस एंड पी ग्लोबल के आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ धर्मकीर्ति जोशी एक साक्षात्कार में कहते हैं, ‘भारत सरकार अमेरिका और ईरान के बीच फंस गई है. उसके लिए संतुलन साधना मुश्किल हो रहा है क्योंकि उसके पास विकल्प बहुत कम हैं.’ उनके मुताबिक सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करे या चुनाव से एकदम पहले तेल की ऊंची कीमतों से निपटे.’

प्रतिबंधों के बाद ईरान से तेल का आयात जारी रखने के बड़े फायदे

आर्थिक मामलों के कुछ विशेषज्ञों की मानें तो अगर भारत चार नवंबर के बाद ईरान से तेल का आयात पूरी तरह बंद नहीं करता है या फिर अमेरिका के साथ मिलकर कोई बीच का रास्ता निकाल लेता है तो यह स्थिति उसके लिए बहुत अच्छी साबित होगी. इनके मुताबिक प्रतिबंधों के बाद दुनियाभर में बढ़ी तेल की कीमतों के बीच भारत के लिए ईरान से तेल के दामों में तोलमोल करना आसान हो जाएगा. ईरान की भी स्थिति ऐसी है कि वह ना-नुकुर नहीं कर सकेगा और कम दाम पर भी भारत को तेल बेचने पर तैयार हो जाएगा.

अमेरिकी प्रतिबंधों को देखते हुए ईरान भारत को पहले ही कई तरह की सहूलियत देने की पेशकश कर चुका है. उसने भारत को तेल की लगभग मुफ्त ढ़ुलाई का ऑफर दिया है, उसका यह भी कहना है कि पैसा चुकाने के लिए भारत और ज्यादा समय ले सकता है. उसने तेल कंपनियों को भी बीमा पैकेज का प्रस्ताव दिया है. ईरान का यह भी कहना है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत से अनाज, दवाओं और अन्य उत्पादों का आयात बढ़ाएगा और डॉलर से बचने के लिए दोनों देश आपसी मुद्रा में ही लेन-देन करेंगे.

अमेरिका ने सहूलियत देने के संकेत दिए हैं

भारत के लिए ईरान से तेल का आयात करने के अलग ही फायदे हैं और न करने के अपने नुकसान. यही वजह है कि भारत अमेरिका से बीच का रास्ता निकालने के लिए लगातार बातचीत कर रहा है. अमेरिका की तरफ से इसे लेकर सकारात्मक संकेत भी मिले हैं लेकिन, उसका यह भी कहना है कि वह किसी तरह की सहूलियत देने पर तब ही विचार करेगा जब पहले ईरान से तेल खरीदना बिलकुल बंद किया जाए. बीते महीने भारत आए अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो का कहना था, ‘हमने भारत सहित सभी देशों से कहा है कि चार नवंबर के बाद ईरान से तेल का आयात शून्य कर दें. हम ऐसा होने के बाद ही कोई छूट देने पर विचार करेंगे.’

हालांकि, बीते हफ्ते अमेरिका की तरफ से इस संदर्भ में जो बयान आया है, वह भारत को राहत देने वाला है. इस बयान में अमेरिका ने कहा है कि वह ईरान पर प्रतिबंध लगने के बाद भारत के लिए तेल आपूर्ति के वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर न पड़े.