पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के नागेर बाजार इलाके में एक बम विस्फोट में एक बच्चे की मौत हो गई. साथ ही, 10 लोग घायल हो गए. इस खबर को आज के कई अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. यह धमाका मंगलवार सुबह नौ बजे एक बहुमंजिला इमारत के पास हुआ. बताया जाता है कि जिस इमारत के सामने यह विस्फोट हुआ वह दक्षिणी दमदम नगर निगम के महापौर और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता पंचू रॉय का दफ्तर है. पंचू रॉय ने दावा किया है कि उन्हें जान से मारने की साजिश के तहत यह धमाका किया गया है.

वहीं, टीएमसी के स्थानीय विधायक पुरणेंदु बसु ने दावा किया है कि इस बम धमाके के पीछे भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का हाथ है. हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, ‘टीएमसी के लोगों में यह एक किस्म का फितूर है कि जब भी ऐसा कुछ होता है वे भाजपा पर आरोप मढ़ देते हैं.’

किसान आंदोलन वापस

स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों सहित अलग-अलग मांगों को लेकर आंदोलित किसानों ने आंदोलन को वापस लेने का फैसला किया है. अमर उजाला की पहली खबर के मुताबिक यह फैसला देर रात किया गया. बताया जाता है कि सरकार ने इन्हें दिल्ली स्थित किसान घाट जाने की इजाजत दे दी. हालांकि, अब कुछ मांगों पर सहमति न होने के बाद भी किसानों ने अपने-अपने घर लौट जाने का फैसला किया है. भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि नहीं मानी गई मांगों के लिए सरकार को पत्र दिया गया है. इसके लिए सरकार ने वक्त की मांग की है. साथ ही, किसानों पर लाठीचार्ज के लिए पुलिस ने भी माफी मांगी है. इससे पहले पुलिस ने दिल्ली आने से रोकने के लिए किसानों पर लाठीचार्ज करने के साथ ही पानी की बौछारें और आंसू के गोले छोड़े थे. इस दौरान करीब 40 किसान घायल हुए.

त्रिपुरा : सीपीएम के मुखपत्र की मान्यता रद्द, पार्टी ने प्रेस की आजादी पर हमला बताया

त्रिपुरा में भाजपा सरकार ने सीपीएम के मुखपत्र ‘देशारकथा’ की मान्यता रद्द कर दी है. इस पर पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. नवभारत टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक पार्टी ने इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया है. सीपीएम पोलित ब्यूरो ने कहा बीते 40 वर्षों से प्रकाशित ‘देशारकथा’ राज्य में दूसरा सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला अखबार है. पोलित ब्यूरो का कहना है कि पहले पश्चिमी त्रिपुरा के जिलाधिकारी ने मनगढ़ंत आधार पर अखबार की मान्यता रद्द कर दी. इसके बाद इस आधार पर अखबारों के रजिस्टार ने भी इसके रजिस्ट्रेशन का प्रमाणपत्र वापस ले लिया.

कंपनियों पर मातृत्व अवकाश का बोझ कम करने की तैयारी

केंद्र सरकार मातृत्व अवकाश की वजह से कंपनियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ की भरपाई करने की तैयारी में है. हिन्दुस्तान ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सरकार एक ऐसा कोष बना सकती है जिसके जरिए कंपनियों को आर्थिक मदद दी जाएगी. बताया जाता है कि इसके लिए सरकार ने सभी पक्षों से मुलाकात कर कंपनियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ के ताजा आंकड़े मंगाए हैं. साथ ही, ईपीएफओ से भी मातृत्व अवकाश 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते करने के बाद महिलाओं की नौकरी में गिरावट के आंकड़े मंगाए गए हैं. माना जा रहा है कि इनके अध्ययन के बाद ही सरकार आर्थिक मदद के लिए कंपनियों और सेक्टर की पहचान करेगी.

आईएल एंड एफएस से बर्खास्त स्वतंत्र निदेशकों ने संकट के लिए एलआईसी को जिम्मेदार बताया

नकदी संकट से जूझ रही इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (आईएल एंड एफएस) से बाहर किए गए स्वतंत्र निदेशकों ने अपना बचाव किया है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक इनका कहना है कि बीते दो-तीन वर्षों से कंपनी में आने वाले वित्तीय संकट के बारे में उन्हें जानकारी थी. स्वतंत्र निदेशकों का दावा है कि इसके लिए उन्होंने कई वैकल्पिक समाधान सुझाए भी थे जिनमें कंपनी को बेचना, कुछ परिसंपत्तियों को बेचना और आईपीओ लाना शामिल था. हालांकि, शेयरधारकों के नामित निदेशकों ने इनमें से किसी भी सुझाव को मंजूरी नहीं दी. इस बारे में एक स्वतंत्र निदेशक ने बताया, ‘अजय पीरामल (पीरामल समूह) 600-650 रुपये प्रति शेयर के भाव से आईएल एंड एफएस में हिस्सा खरीदना चाहते थे लेकिन, एलआईसी ने इसमें अड़ंगा लगा दिया. एलआईसी ने एक शेयर का मूल्य 1200 रुपये आंका था.’ उधर, एलआईसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात पर निराशा जाहिर की है कि बुनियादी क्षेत्र की इस कंपनी की दुर्दशा के लिए उनकी कंपनी को खलनायक माना जा रहा है.