सोमवार को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जस्टिस दीपक मिश्रा के विदाई कार्यक्रम में बोलते हुए कहा था कि जजों का वेतन तीन गुना बढ़ाया जाना चाहिए. ऐसा कहते समय संभवतः उनके दिमाग में जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस रंजन गोगोई रहे होंगे. जस्टिस दीपक मिश्रा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के पद से रिटायर हो गए हैं. आज रंजन गोगोई इस पद की शपथ लेकर देश के 46वें सीजेआई बन जाएंगे. इन दोनों न्यायाधीशों समेत सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों ने अपनी संपत्ति की घोषणा की हुई है. ऐसे में यह जानना दिलचस्प हो सकता है कि शीर्ष अदालत में प्रैक्टिस से अकूत कमाई करने वाले वकीलों के मुकाबले उसी अदालत के इन वरिष्ठतम जजों के पास कितनी संपत्ति है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस रंजन गोगोई के पास अपना कोई सोने का आभूषण नहीं है. उनकी पत्नी के पास जरूर ज्वैलरी है लेकिन, वह उन्हें शादी के समय अपने माता-पिता, रिश्तेदारों और दोस्तों से मिली थी. वहीं, जस्टिस दीपक मिश्रा के पास सोने की दो अंगूठियां और एक चेन है. जस्टिस गोगोई की पत्नी के मुकाबले उनकी पत्नी के पास थोड़ा ज्यादा सोना है. दोनों ही जजों के पास अपना कोई वाहन नहीं है. ऐसा शायद इसलिए क्योंकि करीब दो दशकों से उन्हें सरकारी कारें मिली हुई थीं. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्टों के कुछ जज स्टॉक मार्केट में दिलचस्पी रखते हैं, लेकिन जस्टिस मिश्रा और जस्टिस गोगोई की इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है.

जस्टिस गोगोई पर बैंक से संबंधित कोई कर्ज, ओवरड्राफ्ट, बिल या कोई अन्य देनदारी बकाया नहीं है. वहीं, जस्टिस मिश्रा ने दिल्ली के मयूर विहार इलाके में फ्लैट खरीदने के लिए एक बैंक से 22.5 लाख रुपये का एक कर्ज लिया था जिसे वे चुका रहे हैं. ओडिशा के कटक में उनका एक मकान और है. बैंक बैलेंस की बात करें तो जस्टिस गोगोई और उनकी पत्नी के पास कुल 30 लाख रुपये हैं. इनमें एलआईसी की रकम भी शामिल है. जुलाई में उन्होंने घोषणा करते हुए बताया था कि 1999 में गुवाहाटी हाई कोर्ट का जज बनने से पहले उन्होंने वहां के बेलटोला इलाके में एक जमीन खरीदी थी जिसे उन्होंने जून में बेच दिया था. जस्टिस गोगोई ने यह भी कहा था कि 2015 में उनकी मां ने उनके और उनकी पत्नी के नाम एक जमीन की थी. यह जमीन गोवाहाटी के नजदीक जपोरीगोग इलाके में है.

जस्टिस दीपक मिश्रा ने 21 साल स्थायी जज के रूप में काम किया है. इनमें से 14 साल उन्होंने हाई कोर्टों के जज के रूप में काम करते हुए बिताए हैं. वे 2012 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे. वहीं, जस्टिस रंजन गोगोई फरवरी 2001 में गुवाहाटी हाई कोर्ट के स्थायी जज बने थे. उन्होंने भी 2012 में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ली थी. जज के रूप में लंबे समय तक काम करने के बाद भी इन दोनों जजों की निजी संपत्ति काफी कम है. एक दिन में 50 लाख रु तक कमा लेने वाले सुप्रीम कोर्ट के किसी वरिष्ठ वकील की संपत्ति की तुलना में तो ये जज गरीब की तरह हैं. कई मानते हैं कि अगर इनके जीवन भर की बचत और अन्य संपत्तियों को एक साथ मिला दिया जाए, तो भी वह उन वरिष्ठ वकीलों की एक दिन की कमाई के बराबर नहीं होगी जो अपने मुवक्किलों से भारी भरकम फीस वसूलते हैं.