त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के मुताबिक, ‘त्रिपुरा के स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों में भारतीय नेताओं के बारे में कम जबकि जोसेफ स्टालिन व व्लादिमीर लेनिन जैसे वामपंथी विचारकों व नेताओं के बारे में ज्यादा पढ़ाई करवाई जा रही है. इसलिए राज्य के स्कूलों में अगले शिक्षा सत्र से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) द्वारा तैयार पाठ्यक्रम को लागू कराने की दिशा में काम किया जा रहा है.’ द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक बिप्लब कुमार देब ने ये बातें मंगलवार को त्रिपुरा विश्वविद्यालय में उसके स्थापना दिवस के मौके पर कहीं. इस दौरान उन्होंने आगे कहा, ‘पाठ्यक्रम बदले जाने से स्कूली स्तर पर बच्चों को महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, एपीजे अब्दुल कलाम जैसी हस्तियों के कार्यों और उनके योगदान के बारे में पता चल सकेगा.’

इससे पहले इसी साल जून में त्रिपुरा के शिक्षा मंत्री रतन लाल नाथ ने शिक्षा के लिहाज से त्रिपुरा को पिछड़ा हुआ बताया था. तब उन्होंने यह भी कहा था, ‘मौजूदा स्थिति में सुधार के लिए राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और इं​डीजीनस पीपल्स फ्रंट आॅफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) सरकार पहली से आठवीं कक्षा तक के लिए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू कराएगी.’ त्रिपुरा के शिक्षा मंत्री के अलावा वहां के राज्यपाल तथागत रॉय भी स्कूलों की इतिहास की किताबों के पाठ्यक्रम पर सवाल खड़े कर चुके हैं. इससे पहले साल 2008 में त्रिपुरा की तत्कालीन वामपंथी सरकार ने स्कूली पाठ्यक्रम का बदलाव किया था.