रुपये में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही. गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 43 पैसे गिरकर 73.77 रुपये के नए निचले स्तर पर पहुंच गया. कल यह पहली बार 73 के पार गया था.

जानकारों की मानें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की वजह से रुपये में यह गिरावट हो रही है. कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के पीछे ईरान पर अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले प्रतिबंध हैं जो लागू होने ही वाले हैं. खबरों के मुताबिक यह प्रतिबंध आगामी चार नवंबर से पूरी तरह से लागू हो जाएंगे. इसके अलावा महंगाई बढ़ने और घरेलू शेयर बाजार से विदेशी पैसा निकल जाने के डर के चलते भी यह गिरावट देखने को मिल रही है.

कमजोर रुपये से फायदे क्या और नुकसान क्या?

रुपये की कमजोरी से सबसे बड़ा नुकसान तो यही होता है कि इससे आयातित उत्पाद महंगे हो जाते हैं. साथ ही देश का व्यापार घाटा बढ़ता है क्योंकि हम निर्यात से ज्यादा आयात वाली अर्थव्यवस्था हैं. हम अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करते हैं और रुपया कमजोर होने से न केवल ईंधन और महंगा हो जाता है बल्कि उसकी ढुलाई भी महंगी हो जाती है. आरबीआई ने अप्रैल में बताया था कि रुपये के तीन डॉलर से ज्यादा कमजोर होने पर खुदरा महंगाई में 0.15 फीसदी की वृद्धि हो जाती है. हालांकि कमजोर रुपये से देश के निर्यात को मजबूती मिल सकती है. क्योंकि ऐसे में भारतीय चीजें सस्ती हो जाती हैं, लेकिन जैसा कि पहले जिक्र हुआ, आयात की तुलना में हमारा निर्यात कम है.