यह तो सब जानते ही हैं कि पौष्टिक खाना हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है. इससे डायबिटीज़, कैंसर, मोटापा और हृदयरोग सहित कई रोग होने का जोखिम कम हो जाता है. हालांकि यह कम लोगों को पता है कि पौष्टिक खाना हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी काफी कारगर साबित होता है. यह हमें डिप्रेशन और एंजायटी जैसे मनोरोगों से बचाने में बेहद मददगार साबित हो सकता है. यानी अगर लोग अपनी खानपान की आदतों पर ध्यान देना शुरू कर दें तो वे खुद को कई मनोरोगों या सामान्य मानसिक परेशानियों से बचा सकते हैं. इस दिशा में हाल ही में हुए अध्ययनों से पता चला है कि कुछ विशेष भोजन मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए काफी असरदार साबित होते हैं.

जटिल कार्बोहाइड्रेट

मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रखने का एक तरीका यह है कि आप अपने खाने में जटिल कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा बढ़ाएं. जटिल कार्बोहाइड्रेड वह शर्करा है जिसके अणुओं में फाइबर और स्टार्च शामिल रहते हैं. यह कार्बोहाइड्रेट तमाम फलों, कई तरह की सब्जियों (खासकर आलू और शकरकंद) और अनाजों जैसे चावल में पाया जाता है. ये पदार्थ हमारे शरीर में धीरे-धीरे ग्लूकोज़ छोड़ते हैं. इससे हमें अपने मूड को स्थिर रखने में मदद मिलती है.

जटिल कार्बोहाइड्रेट से इतर सामान्य कार्बोहाइड्रेट चीनी, मिठाई, मीठे स्नैक्स और मीठे पेय पदार्थों में पाया जाता है. जब भी हम ऐसे पदार्थों का सेवन करते हैं तो ये तुरंत हमारा मूड ठीक कर देते हैं. हमारे भीतर खुशी का भाव भर देते हैं, लेकिन इससे मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है.

अक्सर जब हम दुखी या बेचैन होते हैं तो मीठा खाते हैं. लेकिन यह हमारे दिमाग में ऐसी प्रतिक्रिया देता है जिसके चलते हमें ऐसे खाने की लत लग सकती है और यह हेरोइन या कोकीन जैसी ड्रग्स की लत की तरह होती है. ये ड्रग्स भी तुरंत तो मूड ठीक करती हैं, लेकिन लंबे समय में इनका दिमाग पर नकारात्मक असर देखने को मिलता है.

इस तरह भोजन में चीनी और अन्य मीठे पदार्थों की मात्रा घटाने और जटिल कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ाना मानसिक स्वास्थ्य और प्रसन्नता बढ़ाने की दिशा में पहला कदम हो सकता है.

एंटीऑक्सीडेंट्स

कोशिकाओं का ऑक्सीजन की मदद से ऊर्जा का निर्माण करना ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया कहलाती है. ऑक्सीडेशन से हमारे शरीर और मस्तिष्क को ऊर्जा मिलती है. लेकिन इसी प्रक्रिया के दौरान हमारे शरीर में ‘फ्री रेडिकल्स’ पैदा होते हैं. ये एक प्रकार के अणु हैं जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं. ये सबसे ज्यादा मस्तिष्क में पैदा होते हैं.

हमें मुख्यरूप से डोपामाइन और सेरोटोनिन नाम के हार्मोन्स के स्राव से खुशी की अनुभूति होती है लेकिन ऑक्सीडेशन और उससे पैदा हुए फ्री रेडिकल्स इन हार्मोन्स का स्राव कम कर देते हैं. और इस तरह हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.

एंटीऑक्सीडेंट्स की मौजूदगी शरीर में फ्री रेडिकल्स को खत्म करती इसलिए जिन पदार्थों में एंटीऑक्सीडेंट्स ज्यादा पाया जाता है, वे हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेहतर होते हैं. एंटीऑक्सीडेंट्स अमूमन चमकदार हरे-लाल-नारंगी रंग वाले फलों और सब्जियों में पाए जाते हैं.

ओमेगा 3

ओमेगा 3 एक प्रकार के वसा अम्ल (फैटी एसिड) होते हैं जो शरीर में भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करते हैं. ये भी मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं और डोपामाइन, सेरोटोनिन व नोरेपाइनोफ्राइन जैसे खुशी का अनुभव कराने वाले हॉर्मोन्स का स्राव बेहतर करते हैं.

ओमेगा 3 वसा अम्ल मुख्य रूप से मछली, अखरोट, काजू, बादाम, मूंगफली, पत्तेदार सब्जियों, अंडों और मांस (घास चरने वाले पशुओं का) में पाए जाते हैं. यह पाया गया है कि ओमेगा 3 दिमाग की कार्यप्रणाली में सुधार करते हैं, डिप्रेशन की स्थिति को सुधारते हैं और डिमेंशिया को भी रोकते हैं.

ओमेगा 3 ऐसा पोषक तत्व है जो हमारा शरीर पैदा नहीं कर सकता. यह सिर्फ खाद्य पदार्थों से ही हमें मिल सकता है और इसलिए जरूरी है कि हम अपने रोजाना के खाद्य पदार्थों में इसकी उपस्थिति वाले पदार्थों को शामिल करें.

विटामिन बी

विटामिन बी सेरोटोनिन और डोपामाइन हॉर्मोन का स्राव बढ़ाने में काफी अहम भूमिका निभाते हैं. ये विटामिन मुख्य रूप से हरी सब्जियों, फली वाली सब्जियों, केले और चुकंदर में पाए जाते हैं. विटामिन बी6, बी12 और फोलेट की ज्यादा मात्रा वाली डाइट लेने का मतलब है कि आप काफी हद तक डिप्रेशन यानी अवसाद से बचे रहेंगे.

वहीं विटामिन बी की कमी हमारे शरीर में खुशी अनुभव कराने वाले हॉर्मोन्स के स्राव को कम कर देती है. लंबे समय तक ऐसा चलता रहे तो हमें दिमागी सेहत से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

प्रीबायोटिक फाइबर और प्रोबायोटिक

हमारे पेट में अरबों की संख्या में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया पाए जाते हैं और ये भी हमारे मूड, व्यवहार और मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर असर डालते हैं. प्रीबायोटिक फाइबर वे पदार्थ होते हैं जो सीधे पचते नहीं, बल्कि आंतों में जाकर अटक जाते हैं और धीरे-धीरे नष्ट होते हैं. यह प्रक्रिया पेट में अच्छे बैक्टीरिया को पनपने और उन्हें संख्या बढ़ाने में मदद करती है. प्रीबायोटिक फाइबर केले, प्याज, लहसुन सेब के छिलके, और फलियों के साथ-साथ कई अन्य फलों-सब्जियों में पाया जाता है.

वहीं प्रोबायोटिक अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो दही, पनीर या अचार (बंद गोभी का) में पाए जाते हैं. प्रोबायोटिक दिमाग पर वैसा ही असर करता है जैसे अवसाद दूर करने वाली दवाएं.

अपने खानपान में इन पांच प्रकार के पोषक तत्वों को शामिल करने से न सिर्फ आपका शरीर सेहतमंद रहेगा बल्कि आप तमाम मानसिक रोगों के जोखिम और सामान्य मानसिक परेशानियों को भी कम कर सकते हैं.

(ऑस्ट्रेलिया की सदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी की लेक्चरर मेगन ली और जोआन ब्रेडबरी के द कनवर्सेशन वेबसाइट पर प्रकाशित आलेख का भावानुवाद )