इस साल शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए कांगो के डॉ डेनिस मुकवेगे और यजीदी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली नादिया मुराद को चुना गया है. ओस्लो में पांच सदस्यों की पुरस्कार समिति ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की. इन दोनों को युद्ध और सशस्त्र संघर्षों के दौरान हथियार के रूप में यौन हिंसा के इस्तेमाल को खत्म करने के इनके प्रयासों के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा. डॉ डेनिस मुकवेगे स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं. उन्होंने कांगो में सशस्त्र संघर्षों के दौरान सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई हजारों महिलाओं का इलाज किया है.

वहीं नादिया मुराद खुद यौन उत्पीड़न की शिकार रही हैं. साल 2014 के दौरान इराक में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकियों ने हजारों यजीदी लड़कियों को अगवा कर लिया था. इन लड़कियों में 21 साल की नादिया मुराद भी शामिल थीं. खबरों के मुताबिक उन्हें करीब तीन महीने तक बंधक बनाकर रखा गया और इस दौरान उनके साथ रोज बलात्कार किया जाता था. इस बीच उन्हें एक दिन आतंकियों के कब्जे से भागने में सफलता मिल गई. इसके बाद उन्होंने मीडिया और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए इराक में हुए महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामलों को उजागर किया. साल 2016 में नादिया ने अमेरिकी कांग्रेस में भाषण देते हुए अमेरिका से आईएस को खत्म करने की अपील भी की थी. इसके साथ ही पिछले साल दिसंबर में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के सामने अपनी आपबीती सुनाई थी.

नादिया को मलाला युसुफजई के बाद सबसे कम उम्र में नोबेल शांति पुरस्कार पाने का गौरव हासिल हुआ है. नादिया 25 साल की हैं. वहीं मलाला को जब यह पुरस्कार मिला था तब वे 17 साल की थीं.

इसके पहले बीते एक अक्टूबर को अमेरिका के जेम्स पी एलिसन और जापान के तासुकु होंजो को संयुक्त रूप से चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार दिए जाने का ऐलान किया गया था. इन्हें यह सम्मान कैंसर के इलाज में इनकी खोज को लेकर दिया गया है. इसके साथ ही बीते दो अक्टूबर को भौतिकी के नोबेल पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की गई थी. यह पुरस्कार ऑर्थर अश्किन, गेरार्ड मौरू और डोना स्ट्रिक्लैंड को दिया जाएगा. इन तीनों को यह सम्मान लेजर फिजिक्स में इनके असाधारण आविष्कारों के लिए दिया जा रहा है. आठ अक्टूबर को अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार की घोषणा होनी है. इस बार साहित्य का नोबेल नहीं दिया जाएगा और ऐसा 70 साल में पहली बार हो रहा है.