कोई उनमें भारतीय क्रिकेट का भविष्य देख रहा है तो कोई उनकी तुलना क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर से कर रहा है. वैसे सिर्फ 18 साल की उम्र में जिसने गुंडप्पा विश्वनाथ के क्लब में अपना नाम लिखवा लिया हो, 50 साल से ज्यादा पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया हो और जो रणजी ट्रॉफी, दिलीप ट्रॉफी और टेस्ट क्रिकेट में शतक से आगाज करने वाला इकलौता भारतीय बन गया हो, उसे इस तरह के खिताब मिलने स्वाभाविक भी हैं.

गुरूवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने पहले टेस्ट मैच में शतक बनाने के बाद से मुम्बई के पृथ्वी शॉ सुर्ख़ियों में हैं. सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण से लेकर क्रिकेट के बड़े-बड़े विश्लेषकों तक हर कोई उनकी जमकर प्रशंसा कर रहा है. इस शानदारी पारी के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच का खिताब भी दिया गया है. इससे पहले पृथ्वी शॉ बीते फरवरी में तब चर्चा में आए थे जब भारतीय टीम ने उनके नेतृत्व में अंडर-19 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था. विश्वकप में अपनी कप्तानी का जौहर दिखाने के साथ-साथ उन्होंने अपनी सलामी बल्लेबाजी से लगभग हर मैच में एक बेहतर शुरुआत दी थी जिसने टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई.

भले ही अधिकांश लोगों ने पृथ्वी का नाम साल 2018 में सुना हो, लेकिन वे घरेलू क्रिकेट में पिछले करीब दो सालों से धूम मचाए हुए थे. साल 2017 की जनवरी में जब छोटे से कद के पृथ्वी शॉ का चयन मुंबई की रणजी टीम में हुआ तो कइयों के लिए यह बेहद चौंकाने वाली खबर थी. इसके दो कारण थे - एक तो उनकी उम्र महज 17 साल थी, दूसरा यह मैच कोई साधारण मैच नहीं बल्कि रणजी ट्रॉफी का सेमीफाइनल मुकाबला था. लेकिन, पृथ्वी शॉ ने अपने प्रदर्शन से इस चयन को सही साबित किया. उन्होंने अपने इस पहले प्रथम श्रेणी मैच की दूसरी पारी में शानदार शतक लगाकर मुंबई को फाइनल में पहुंचाने में अहम योगदान दिया. इस मैच में उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना गया.

पृथ्वी शॉ इसके बाद फिर सितंबर 2017 में चर्चा में आए जब उन्होंने अपने पहले दिलीप ट्रॉफी मैच में ‘इंडिया रेड’ की ओर से खेलते हुए शानदार 154 रन बनाए. यह भी कोई आम मैच नहीं बल्कि दिलीप ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला था जिसमें उनकी पारी के चलते ‘इंडिया रेड’ ने खिताब अपने नाम किया.

इस उम्र में ही अगर पृथ्वी की सचिन से तुलना की जाने लगी है तो उसके पीछे पर्याप्त वजहे हैं. वे न सिर्फ दिलीप ट्रॉफी में बल्कि टेस्ट क्रिकेट में भी सचिन तेंदुलकर के बाद शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं. सचिन ने दिलीप ट्रॉफी में उनसे 58 दिन पहले यानी 17 साल 262 दिन की उम्र में यह कारनामा किया था. जबकि टेस्ट मैच में जहां पृथ्वी ने 18 साल और 329 दिन की उम्र में शतक लगाया है, वहीं सचिन ने यह उपलब्धि 17 साल 112 दिन में हासिल कर ली थी. रणजी और दिलीप ट्रॉफी दोनों के अपने पहले मैचों में शतक ठोकने वाले भी ये दो ही हैं. इसके अलावा पृथ्वी और सचिन के आंकड़ों में एक और समानता भी है. इन दोनों ने ही 18 साल की उम्र तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सात शतक लगाए हैं.

सचिन तेंदुलकर से पृथ्वी शॉ की तुलना का एक कारण यह भी है कि उन्होंने 2013 में मुंबई के प्रतिष्ठित इंटर स्कूल ‘हैरिस शील्ड’ टूर्नामेंट के एक मैच में 546 रनों की पारी खेली थी. यह वही टूर्नामेंट है जिसके एक मैच में कभी तेंदुलकर ने 326 रन बनाए थे. हालांकि, स्कूल क्रिकेट में पृथ्वी ने इससे भी बड़ा धमाल इंग्लैंड में जाकर मचाया था. उन्होंने इंग्लैंड के मैनचेस्टर में होने वाले एक प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में 84 के औसत से 1,446 रन बनाए थे और यहां भी पहले मैच में ही शतक जमाया था.

केवल आंकड़े, कद काठी और शालीनता ही नहीं बल्कि पृथ्वी के खेलने का अंदाज भी सचिन से काफी मिलता है. उनका कवर ड्राइव, सीधे बल्ले से बेहतरीन टाइमिंग के साथ किया गया स्ट्रेट ड्राइव और उछलकर गली के ऊपर से गेंद को मैदान से बाहर भेजना सचिन की याद दिलाता है. हालांकि, शैली के मामले में ऐसा भी लगता है कि उन्होंने वीरेंद्र सहवाग से भी बहुत कुछ सीखा है. उनका बैकफुट पर जाकर स्ट्रोक खेलना और कट लगाने का अंदाज हूबहू सहवाग जैसा है.

पृथ्वी शॉ की एक बड़ी खासियत यह भी है कि उन्हें औरों से अलग बड़े मैच काफी रास आते हैं. रणजी ट्रॉफी और दिलीप ट्रॉफी के बड़े मुकाबलों के बाद इस नौजवान ने बीते साल भारत आई न्यूजीलैंड की टीम के खिलाफ अभ्यास मैच में अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया था. इस मैच में नन्हे पृथ्वी ने टिम साउथी, ट्रेंट बोल्ट, ईश सोढ़ी और मिचेल सैंटनर जैसे दुनिया के नामी गेंदबाजों का बेधड़क सामना किया और 80 गेंदों में शानदार 66 रन की पारी खेली. वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट में शतक लगाकर भी उन्होंने इस बात को साबित किया है.

बीते साल दिसंबर में जब पृथ्वी को अंडर-19 विश्व कप के लिए भारतीय टीम की कमान सौंपी गई तो मशहूर टायर निर्माता कंपनी ‘एमआरएफ’ ने पृथ्वी के साथ एक अनुबंध साइन किया. एमआरएफ ने इससे पहले केवल सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा, स्टीव वा और विराट कोहली जैसे कुछ गिने चुने खिलाड़ियों के साथ ही करार किया है जिसके तहत ये खिलाड़ी अपने बल्ले पर ‘एमआरएफ’ के लोगो का इस्तेमाल करते हैं.

पृथ्वी इस साल आईपीएल में भी खेलते नजर आए. दिल्ली की ओर से उन्होंने आईपीएल के नौ मैचों में 27 से ज्यादा के औसत से 245 रन बनाए. इनमें दो अर्धशतक भी शामिल थे.

पिछले दो सालों में मैच-दर-मैच अपने प्रदर्शन का लोहा मनवाने वाले पृथ्वी में जहां उनके प्रशंसक सचिन तेंदुलकर की छवि देखते हैं, वहीं दुनिया भर के क्रिकेट विश्लेषक भी मानते हैं कि पृथ्वी उसी फेहरिस्त के खिलाड़ी हैं जिसमें सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली आते हैं. इन लोगों को पूरी उम्मीद है कि इन्हीं तीनों की तरह आने वाले सालों में वे भी बहुत बड़े खिलाड़ी बनेंगे.