रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने इस बार नीतिगत ब्याज दरों (रेपो दर और रिवर्स रेपो दर) में कोई बदलाव नहीं किया है. यानी रेपो दर 6.5 फीसदी और रिवर्स रेपो दर 6.25 फीसदी ही रहेगी. आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्यों की हुई बैठक में यह फैसला किया गया. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक समिति के पांच सदस्यों ने दरों को न बदलने के पक्ष मत दिया. सिर्फ चेतन घटे ने 0.25 प्रतिशत वृद्धि का पक्ष लिया.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के बढ़ते दामों और रुपये की गिरते मूल्य के बीच यह कयास लगाए जा रहे थे कि नीतिगत ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं. इसके अलावा एमपीसी ने पिछले दो मौकों पर लगातार रेपो रेट में बढ़ोतरी की थी. इसलिए अधिकांश विश्लेषक और बैंक अधिकारी इस बार भी ऐसा होने की संभावना जता रहे थे.

देश के निजी और सरकारी बैंक अपने रोजमर्रा के कारोबार और वित्तीय लेनदेन को निपटाने के लिए आरबीआई से जिस दर पर पैसा हासिल करते हैं उसे रेपो रेट कहा जाता है. रिवर्स रेपो रेट वह दर होती है जिसे बैंकों द्वारा आरबीआई के पास जमा कराने पर उन्हें दैनिक रूप से ब्याज मिलता है. आरबीआई की तीसरी नीतिगत दर कैश रिजर्व रेशियो कहलाती है. इसके तहत बैंकों को आरबीआई के पास एक निश्चित रकम जमा करके रखनी होती है.