डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने 400 अनुयायियों को नपुंसक बनाने वाले मामले में शुक्रवार को जमानत दे दी. हालांकि दो साध्वियों के बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम को अभी जेल में ही रहना पड़ेगा.

नवभारत टाइम्स के मुताबिक अनुयायियों को नपुंसक बनाने से जुड़े इस मामले की सुनवाई सीबीआई के विशेष जज सुनील राठी की अदालत कर रही थी. लेकिन वहां जमानत याचिका खारिज होने के बाद राम रहीम ने सीबीआई के ही दूसरे विशेष जज जगदीप सिंह के समक्ष जमानत याचिका दायर कर दी जिसे अदालत ने शुक्रवार को स्वीकृति दे दी. राम रहीम को इस तरह जमानत मिलने के कारण सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.

क्या है मामला?

साल 2012 में राम रहीम के ही एक पूर्व अनुयायी ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में इस बाबत एक याचिका दायर की थी. इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की भी गुहार लगाई गई थी जिसे हाईकोर्ट ने 2015 में मंजूरी देते हुए मामला जांच एजेंसी के सुपुर्द कर दिया था. कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले में बाबा सहित दो डॉक्टरों, पंकज सिंह और एमपी सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था. साल 2016 में गुरमीत राम रहीम को सीबीआई जज सुनील राठी की विशेष सीबीआई अदालत ने दोषी करार दिया था.