कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सोशल मीडिया टीम में सब ठीक नहीं चल रहा है. इस टीम की प्रमुख कर्नाटक की कांग्रेस नेता दिव्या स्पंदना ‘राम्या’ हुआ करती थीं. लेकिन वे तीन-चार दिनों से सोशल मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं. इसीलिए इस बाबत तमाम ख़बरें आ रही हैं. इनमें एक ये है कि उनका ओहदा घटा दिया गया है. दूसरी ये कि उन्होंने ख़ुद यह ज़िम्मेदारी छोड़ी है. और तीसरी जो सूत्रों के हवाले से सामने आई है कि राहुल गांधी की सोशल मीडिया टीम में यह जो उठापटक चल रही है उसके पीछे कर्नाटक कांग्रेस की अंदरूनी चुनावी सियासत भी हो सकती है. यह तीसरी ख़बर डीएनए ने दी है.

सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी की सोशल मीडिया टीम में दिव्या स्पंदना के अलावा एक और युवा नेता- निखिल अल्वा भी अहम भूमिका निभा रहे थे. शुरूआत में तो निखिल और दिव्या को एक-दूसरे से कोई दिक्क़त नहीं थी. लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच तल्ख़ी बढ़ने लगी. यह स्थिति तब बनी जब मीडिया में आई कुछ ख़बरों में निखिल के लिए ‘राहुल गांधी के ट्विटर हैंडल का गेटकीपर’ जैसे विशेषण इस्तेमाल किए जाने लगे. इसके बाद से ही स्पंदना उन्हें तमाम मामलों में दरकिनार करने लगीं.

यहां बताते चलें कि निखिल कांग्रेस की पूर्व वरिष्ठ नेता मार्ग्रेट अल्वा के दूसरे नंबर के बेटे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजस्थान की राज्यपाल रहीं मार्ग्रेट अल्वा के दो और बेटे हैं. इनमें सबसे बड़े हैं- नीरत और तीसरे नंबर के निवेदित. इनमें नीरत तो निखिल की तरह की मीडिया और मनोरंजन जगत में सक्रिय हैं लेकिन निवेदित सक्रिय राजनीति में हैं. निवेदित 2008 में कर्नाटक विधानसभा और 2014 के लोक सभा चुनाव के दौरान पार्टी की ओर से टिकट के दावेदारों में शुमार थे.

राहुल गांधी की सोशल मीडिया टीम के प्रमुख के तौर पर स्पंदना की विदाई के बाद अब यह ज़िम्मेदारी संभाल रहे निखिल के बारे में भी कहा जाता है कि वे शुरू से इस पद पर आना चाहते थे. उन्हें जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के लिए ‘गब्बर सिंह टैक्स’ का जुमला इज़ाद करने का श्रेय भी जाता है. दूसरी बात- निखिल अगले लोक सभा चुनाव में बेंगलुरू की किसी सीट (शायद दक्षिण) से छोटे भाई निवेदित को टिकट भी दिलाना चाहते हैं. इसी से स्पंदना के साथ उनका मतभेद और बढ़ा.

इसका कारण ये है कि स्पंदना खुद लोक सभा चुनाव लड़ना चाहती हैं. वे अपने लिए दो सीटें देख रही हैं. एक- मांड्या. लेकिन ये सीट संभवत: जेडीएस (जनता दल-धर्मनिरपेक्ष) से गठबंधन होने पर उसे मिल सकती है. दूसरी- बेंगलुरू-दक्षिण, जिसके बारे में वे अपने समर्थकों से बातचीत करने के लिए शनिवार को बेंगलुरू जा भी रही हैं. इस सबके अलावा स्पंदना से कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला भी नाख़ुश बताए जाते हैं. क्योंकि वे उनकी भी लगातार अनदेखी कर रही थीं.

सूत्रों की मानें तो ऐसे ही तमाम कारकों ने मिलकर स्पंदना की सोशल मीडिया टीम के प्रमुख के तौर पर विदाई की भूमिका लिखी है. लेकिन इसका असर अभी आने वाले दिनों में भी दिख सकता है.