कभी दक्षिण भारत के जंगलों में आतंक मचाने वाले चंदन तस्कर वीरप्पन काे मरे हुए 14 साल बीत हो चुके हैं. लेकिन उसकी चर्चाएं गाहे-बगाहे अब भी हो जाती हैं. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ताज़ा मामला एम षणमुगप्रिया नाम की एक महिला से जुड़ा है. इस महिला का दावा है कि उसने वीरप्पन को ठिकाने लगाने में पुलिस की मदद की थी. इस मदद के एवज़ में उसे पुरस्कार दिए जाने का वादा किया गया था. लेकिन आज 14 साल बीत जाने के बाद भी उसे पुरस्कार नहीं मिला है.

तमिलनाडु में कोयंबटूर शहर के वदवल्ली की रहने वाली षणमुगप्रिया ने अख़बार को बताया है, ‘मुझे वीरप्पन को ठिकाने लगाने के लिए चलाए गए अभियान में 2004 में शामिल किया गया था. इस दौरान वीरप्पन की पत्नी मुथुलक्ष्मी मेरे घर पर चार महीने तक किराए से रही थी. मुथुलक्ष्मी के साथ मेरी अच्छी दोस्ती गई थी इसीलिए पुलिस चाहती थी कि मैं उसके जरिए वीरप्पन के बारे में अहम गोपनीय सूचनाएं हासिल करूं. फिर ये सूचनाएं पुलिस के विशेष दस्ते के साथ साझा करूं.’

उन्होंने बताया, ‘मैंने मुथुलक्ष्मी के जरिए वीरप्पन के गिरते स्वास्थ्य, आंखों की कम होती रोशनी और जंगल में उसके ठिकानों के बारे में सूचनाएं हासिल कर पुलिस से साझा भी कीं. इसके लिए मैंने अपनी जान जोख़िम में डाली. इन सूचनाओं की मदद से पुलिस अक्टूबर 2004 में वीरप्पन और उसके चार साथियों को ठिकाने लगा पाई. इसके बाद पुलिस के विशेष दस्ते (एसटीएफ) के कुछ शीर्ष अधिकारियों ने मुझसे मौखिक तौर पर वादा किया था कि मुझे भी पुरस्कृत किया जाएगा.’

षणमुगप्रिया के अनुसार, ‘आज 14 साल बीतने के बाद भी मुझे पुरस्कार तो मिला नहीं बल्कि बदनामी ही नसीब हुई और उसके साथ तकलीफें भी. मैंने 10 साल के इंतज़ार के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्र लिखा लेकिन कुछ नहीं हुआ.’ वीरप्पन को ठिकाने लगाने वाली पुलिस टीम की अगुवाई करने वाले पुलिस अधिकारी- आईजी (पुलिस महानिरीक्षक) एनके सेंथमराई कन्नन भी मानते हैं कि उस ‘अभियान में षणमुगप्रिया से मदद ली गई थी. उन्होंने अहम सूचनाएं भी साझा की थीं.’

हालांकि पुरस्कार के सवाल पर कन्नन ने कहा, ‘हमने वीरप्पन को ठिकाने लगाने के लिए कई अभियान चलाए थे. इनमें से एक में षणमुगप्रिया की भी मदद ली थी. अंतिम अभियान सफल होने के बाद हमारी ओर से उन सभी लोगों के लिए पुरस्कार की अनुशंसा की गई थी जिन्होंने हमारी मदद की थी. फिर वे चाहे आम लोग हों या दूसरे विभागों के कर्मचारी. जहां तक बात षणमुगप्रिया को पुरस्कार न मिलने का मसला है तो इस पर हमें कुछ नहीं कहना है.’