गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य में रह रहे एशियाई सिंहों का टीकाकरण शुरू हो गया है. गांधीनगर में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि फिलहाल उन्हीं शेरों का टीकाकरण किया जा रहा है जो वन विभाग के संरक्षण में हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक जूनागढ़ के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) ने सोमवार को ट्वीट किया, ‘मानक प्रोटोकोल के अनुसार सघन पशुचिकित्सा के तहत अलग किए गए शेरों का टीकाकरण शुरू हुआ है. इस टीकाकरण पर शीर्ष राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की राय ली गई है. उसी के मुताबिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है.’ ग़ौरतलब है कि गिर राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य जीव अभयारण्य जूनागढ़ जिले में ही आता है. यहां बीते एक पखवाड़े के भीतर 23 एशियाई शेरों की मौत हो चुकी है.

ख़बरों के मुताबिक मारे गए शेरों में पांच की मौत जानलेवा सीडीवी (कैनाइन डिस्टेंपर वायरस) के संक्रमण से हुई है. इसीलिए इस मामले को लेकर पर्यावरण और वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञ चिंतित है. क्योंकि इसी बीमारी ने 1990 के दशक में सेरेंगेती और तंजानिया में 800 के क़रीब अफ्रीकी सिंहों की जान ले ली थी. हालांकि गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी अब भी कह रहे हैं, ‘स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. गिर के शेर सुरक्षित हैं. उन्हें कहीं स्थानांतरित नहीं किया जाएगा.’

ग़ौरतलब यह भी है कि गिर के सिंहों को गुजरात से मध्य प्रदेश के कूनो-पालपुर में स्थानांतरित किए जाने की मांग काफी समय से चल रही है. उच्चतम न्यायालय ने भी अप्रैल-2013 में इसका आदेश जारी कर दिया था. लेकिन नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल से ही गुजरात इन शेरों को राज्य से बाहर न भेजने पर अड़ा हुआ है. बावज़ूद इसके कि शेरों की आबादी गिर में लगातार कम हो रही है. यहां 2015 में 523 शेर थे. यह तादाद बीते तीन साल में ही 300 से नीचे आ चुकी है, ऐसा जानकार बताते हैं.