दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र नजीब अहमद की गुमशुदगी के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति दे दी है. सीबीआई ने कोर्ट में चार सितंबर को सीआरपीसी की धारा 169 (साक्ष्यों के अभाव में आरोपितों को छोड़ना) के तहत इस मामले को बंद करने की अनुमति मांगी थी. तब कोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सीबीआई को यह अनुमति देने के साथ ही जस्टिस एस मुरलीधर और विनोद गोयल की पीठ ने नजीब की मां फातिमा को मामले की स्टेटस रिपोर्ट हासिल करने और अन्य शिकायतें दर्ज कराने के लिए निचली अदालत में जाने को कहा है.

वहीं, नजीब मामले की पैरवी कर रहे वकील कोलिन गोंजाल्विस ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि आरोपितों से पूछताछ न कर जांच एजेंसी उन्हें बचा रही है. गोंजाल्विस ने कोर्ट में कहा है, ‘सीबीआई दबाव में झुक गई है और वह इस मामले में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच नहीं कर पाई है.’

27 वर्षीय नजीब 15 अक्टूबर, 2016 को जेएनयू के माही-मांडवी हॉस्टल से लापता हो गए थे. बताया जाता है कि गुमशुदा होने से पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कथित कार्यकर्ताओं के साथ उसकी कहासुनी हुई थी. 25 नवंबर, 2018 को नजीब की मां इस मामले को लेकर हाई कोर्ट पहुंच गई थीं. इसी साल मई में कोर्ट ने इस मामले को दिल्ली पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दिया था.