पाकिस्तान भारी नकदी संकट से जूझ रहा है और देश के सामने भुगतान संतुलन का संकट पैदा हो गया. पीटीआई के मुताबिक इस खतरे से निपटने के लिए पाकिस्तान की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का रुख किया है. पाक इस समस्या से निपटने के लिए आईएमएफ के सामने राहत पैकेज (बेलआउट) की गुहार लगा सकता है.

शुरुअात में पाकिस्तान आईएमएफ से मदद लेने में हिचकिचा रहा था क्योंकि प्रधानमंत्री इमरान खान अतीत में आईएमएफ से मदद लेने का विरोध करते रहे हैं. लेकिन संकट बढ़ता देख उन्होंने खुद आईएमएफ से संपर्क करने का फैसला लिया और सोमवार को इसकी बाकायदा घोषणा कर दी गई. पाक वित्त मंत्री असद उमर का कहना है कि प्रधानमंत्री ने फैसले को मंजूरी दे दी है, अब जल्द ही आईएमएफ से बात शुरु की जाएगी.

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आईएमएफ को पाकिस्तान की मदद के लिए चेताया है. उन्होंने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिलने वाली मदद का इस्तेमाल पाकिस्तान चीन का कर्ज चुकाने में कर सकता है. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मंदे निर्यात के कारण गहरे संकट में है. अगर आईएमएफ पाकिस्तान को मदद देता है तो यह उसका 13वां बेलआउट पैकेज होगा.