आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) का सरगना मसूद अज़हर संभवत: मौत की कग़ार पर पहुंच गया है. भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों के सूत्रों के हवाले से यह ख़बर हिंदुस्तान टाइम्स ने दी है. इसके मुताबिक अज़हर इस वक़्त किसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहा है और बिस्तर पर पड़ा हुआ है. उसकी हालत दिनों-दिन बिगड़ती जा रही है.

अख़बार के मुताबिक 50 वर्षीय मसूद अज़हर की हालत अब ऐसी भी नहीं है कि वह अपने संगठन की गतिविधियां संचालित कर सके. बीमारी ने उसकी रीढ़ की हड्‌डी और गुर्दे (किडनी) पर काफी बुरा असर डाला है. बताया जाता है कि रावलपिंडी के सैन्य अस्पताल में उसका इलाज़ हो चुका है. लेकिन हालत में सुधार दिखाई नहीं हुआ है. बल्कि वह बीते डेढ़ साल से बिस्तर पर पड़ा हुआ है. इसी कारण से वह काफी समय से अपने गृहनगर- भावलपुर या पाकिस्तान की किसी अन्य जगह में दिखाई भी नहीं दिया है.

बताया जाता है कि अज़हर की ग़ैरमौज़ूदगी में उसके दो छोटे भाई- रऊफ असग़र और अतहर इब्राहिम संगठन की गतिविधियां संचालित कर रहे हैं. वे लगातार भारत और अफ़ग़ानिस्तान में आतंकी हमलों के लिए अपने लड़ाके भेज रहे हैं. ग़ौरतलब है कि मसूद अज़हर को 2001 में भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले का मुख्य साज़िशकर्ता माना जाता है. साल 2005 में अयोध्या और 2016 में पठानकोट एयरबेस (भारतीय वायु सेना का अड्डा) पर हुए आतंकी हमलों के पीछे भी उसी का दिमाग रहा है.

इन्हीं कारणों से भारत काफी समय से इस कोशिश में है कि अज़हर को वैश्विक आतंकियों की संयुक्त राष्ट्र संघ की सूची में शामिल करा लिया जाए. उसके इस प्रयास को अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों का भी समर्थन है. बल्कि अमेरिका ख़ुद अपनी तरफ से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस बाबत प्रस्ताव पेश कर चुका है. लेकिन पाकिस्तान का मददग़ार चीन इस प्रस्ताव की राह में रोड़ा बना हुआ है. हालांकि भारतीय राजनयिक सूत्रों की मानें तो ‘अज़हर की बीमारी ने अब भारत की राह आसान कर दी’ है.