भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) को लेकर अहम बयान दिया है. उसने कहा है कि यूएनएससी को बिना देर किए खुद में सुधार करने की जरूरत है. भारत के मुताबिक अगर जल्द से जल्द ऐसा नहीं किया जाता तो यूएनएससी पर अपनी प्रासंगिकता खोने का खतरा मंडराने लगेगा. पीटीआई-भाषा की खबर के मुताबिक सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि 15 राष्ट्रों वाली सुरक्षा परिषद में केवल प्रधानता को महत्व दिया जाता है और इसके उद्देश्य कम हैं.

सैयद अकबरुद्दीन ने ‘रिपोर्ट ऑफ द सेक्रेटरी जनरल ऑन द वर्क ऑफ द ऑर्गेनाइजेशन’ पर बोलते हुए यह बात कही है. उन्होंने कहा, ‘अगर नई वैश्विक चुनौतियों से निपटना है तो अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के उस ढांचे को बदलना जरूरी है जो आधुनिक दुनिया से मेल नहीं खाता. इस बदलाव की सबसे ज्यादा जरूरत यूएनएससी में है. हमें खामियों को सुधारने की जरूरत है. इससे पहले कि बहुत देर हो जाए ऐसा करना हमारे लिए जरूरी है. भविष्य की तकनीकें अतीत के संघर्षों को और बढ़ाएं, उससे पहले यह काम करना आवश्यक है. लेकिन परिषद अपनी क्षीण होती प्रासंगिकता को बहाल करने में व्यस्त है.’

भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने हाल में महासभा की उच्च स्तरीय बैठक में कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात की लेकिन, उन्हें लेकर न तो महासभा अपने विकास और मानदंड संबंधी पहलुओं से निपट रही है और न ही सुरक्षा परिषद शांति व सुरक्षा संबंधी जटिलताओं का समाधान कर पा रही है.