शिवसेना ने एक बार फिर राम मंदिर को लेकर भाजपा और मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है. पीटीआई के मुताबिक शिवसेना ने कहा है कि भाजपा का यह कहना केवल दिखावा है कि मंदिर निर्माण पर फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा.

मंगलवार को शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में सरकार से सवाल करते हुए लिखा, ‘जब मोदी सरकार एससी-एसटी और तीन तलाक कानून पर अदालत के आदेशों को दरकिनार कर अध्यादेश ला सकती है तो राममंदिर निर्माण के लिए और समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए अध्यादेश क्यों नहीं ला सकती?’ शिवसेना ने भाजपा और केंद्र सरकार के इस रवैय्ये को स्थिति से मुंह मोड़ने जैसा बताया है.

सामना में छपे संपादकीय में दावा किया गया है कि अब सत्तारूढ़ पार्टी ने राम मंदिर के लिए आवाज उठाने वालों को ही परेशान करना शुरू कर दिया है. कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए लिखा है, ‘पिछले दिनों राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर अनशन पर बैठे महंत परमहंस दास को पुलिस ने जबरदस्ती उठा लिया और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देकर उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया.’

केंद्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने भाजपा पर तंज कसते हुए यह भी कहा है, ‘भगवान राम भाजपा के लिए ‘अच्छे दिन’ ले आए लेकिन इसके बावजूद अभी तक राम खुद वनवास में हैं.’

संपादकीय के अंत में शिवसेना ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा है कि इस समय केंद्र और राज्य (उत्तर प्रदेश) दोनों ही जगह भाजपा की सरकार है. अगर इसके बावजूद मंदिर नहीं बनता है तो जनता निश्चित ही अगले चुनाव में उसे सत्ता से बेदखल कर देगी.