अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपने एक अनुमान में कहा है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से भारत जैसे देशों की उत्पादकता में तेजी से बढ़ोतरी होगी. पीटीआई-भाषा की खबर के मुताबिक आईएमएफ ने अपने एक शोधपत्र में यह बात कही है. उसके मुताबिक महिलाओं के आने से काम में नए कौशल का समावेश होता है और इससे कार्यबल में वृद्धि होती है जिसका फायदा राष्ट्र को मिलता है.

शोधपत्र में आईएमएफ ने कहा है कि पिछले दो दशक में काम की जगहों पर महिला कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है. हालांकि उसने यह भी कहा कि यह बढ़ोतरी समान नहीं है और अभी भी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या काफी कम है. उसके मुताबिक अनुपात के लिहाज से महिलाओं की बेरोजगारी कम करना पुरुषों को रोजगार देने की अपेक्षा अधिक फायदेमंद होता है.

हालांकि महिलाओं की भागीदारी को लेकर आईएमएफ ने एक चेतावनी भी दी है. उसने कहा है कि नई तकनीक के चलते वैश्विक स्तर पर महिलाओं से जुड़ीं लगभग 18 करोड़ नौकरियां खत्म हो सकती है. आईएमएफ और विश्व बैंक की सालाना बैठक के दौरान जारी किए गए एक नोट में यह बात कही गई है. इसमें 30 देशों के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार बताया गया है कि बड़े पैमाने पर महिलाओं की नौकरियां जाने का अनुमान है. नोट के मुताबिक नई प्रौद्योगिकी नौकरियों की मांग को कम कर सकती है. इससे महिलाओं को रोजमर्रा के कार्यों के लिए कम पारिश्रमिक मिलेगा और श्रम बाजार में उनकी भागीदारी कम होने की स्थिति पैदा होगी.

इसके मद्देनजर आईएमएफ ने दुनियाभर के नेताओं से अपील की है कि वे महिलाओं को जरूरी कौशल प्रदान करें, ऊंचे पदों पर लैंगिक अंतर को कम करें, साथ ही कामगारों के लिए डिजिटल अंतर को पाटने के लिए भी काम करें.