यौन शोषण को लेकर सोशल मीडिया पर चलाई जा रही ‘मी टू’ मुहिम पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद उदित राज ने सवाल उठाए हैं. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उदित राज ने इस मुहिम की जरूरत तो बताई है, साथ ही सवालिया लहजे में यह भी कहा है कि किसी आरोप की सच्चाई आखिर दस साल बाद कैसे पता लगाई जा सकती है.

उदित राज ने कहा है, ‘मी टू कैंपेन जरूरी है, लेकिन किसी व्यक्ति पर दस साल बाद यूं शोषण का आरोप लगाने का क्या मतलब है? इतने सालों बाद ऐसे मामले में सत्यता की जांच कैसे हो सकेगी? जिस व्यक्ति पर झूठा आरोप लगा दिया जाएगा उसकी छवि का कितना बड़ा नुकसान होगा, ये सोचने वाली बात है. ये गलत प्रथा की शुरुआत है.’

इसके अलावा भाजपा सांसद ने ट्विटर के जरिए लिव-इन-रिलेशन में रहने वाली महिलाओं द्वारा बलात्कार के आरोपों पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने एक ट्वीट में लिखा है, ‘ये कैसे संभव है कि कोई लिव इन रिलेशन में रहने वाली लड़की अपने पार्टनर पर कभी-भी रेप का आरोप लगाकर उस व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज करा दे, वो व्यक्ति जेल चला जाए? इस तरह की घटनाएं आये दिन किसी न किसी के साथ हो रही हैं.’ इसी ट्वीट में उदित राज ने आगे लिखा है, ‘क्या ये अब ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल नहीं हो रहा है.’

उधर, बीते दिनों फिल्म अ​भिनेत्री तनुश्री दत्ता द्वारा फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर पर यौन शोषण के आरोप लगाए जाने के बाद कई अन्य महिलाओं ने भी सोशल मीडिया पर अपने साथ हुए कथित शोषण के बारे में लिखा है. इनमें लेखक चेतन भगत व स्टैंडअप कॉमेडियन उत्सव चक्रवर्ती, फिल्म-टीवी कलाकार आलोक नाथ व तन्मय भट्ट, फिल्म निर्देशक विकास बहल व विवेक अग्निहोत्री, डीएनए के पूर्व संपादक गौतम अधिकारी के अलावा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में बतौर संपादक काम कर चुके केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर जैसी चर्चित हस्तियों पर शोषण का आरोप लगाया गया हैं.